
India Pakistan War
वॉशिंगटन में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की एक बेहद अहम बैठक होने जा रही है, जिसमें पाकिस्तान को दिए जा रहे कर्ज (Pakistan debt) की समीक्षा की जाएगी। एक तरफ तो पाकिस्तान जंग लड़ने (India Pakistan War) पर आमादा है, दूसरी तरफ उसे देश चलाने के लिए कर्ज चाहिए। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस फंडिंग का विरोध करेगा।
भारत ने IMF से साफ-साफ कहा है कि किसी भी आर्थिक मदद से पहले पाकिस्तान की जमीनी हकीकत को ध्यान में रखा जाए। पाकिस्तान लगातार आतंकवाद को बढ़ावा देता आया है। पहलगाम में पाकिस्तानी आतंकियों ने मासूम पर्यटकों को निशाना बनाया। आतंकियों पर कार्रवाई करने के बजाय पाकिस्तान उनकी मौजूदगी को नकारता रहा।
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जब भारत ने अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ढांचों को ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के तहत नष्ट किया, तो इस्लामाबाद युद्ध लड़ने को तैयार हो गया (India Pakistan War)। उसकी तरफ से भारत के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की जा रही है।
पाकिस्तान की कार्रवाई उकसावे वाली और जंग शुरू करने वाली है। लेकिन, क्या पाकिस्तान जंग लड़ सकता है?
कर्ज के दलदल में डूबता पाकिस्तान
2024 के आंकड़ों के अनुसार पाकिस्तान का कुल बाहरी कर्ज (Debt on Pakistan) $130 बिलियन से भी ऊपर है, जिसमें से 20% से ज्यादा हिस्सा अकेले चीन का है। वहीं, विदेशी मुद्रा भंडार सिर्फ $15 बिलियन के आसपास है, जो महज तीन महीने के आयात को ही पूरा कर सकता है। इतना ही नहीं, 2025 में पाकिस्तान को $22 बिलियन का बाहरी कर्ज चुकाना है।
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इस बदहाली के चलते IMF ने 2024 में पाकिस्तान को एक $7 बिलियन का बेलआउट पैकेज दिया था, लेकिन ये भी स्थायी समाधान नहीं साबित हो रहा। IMF की अप्रैल की रिपोर्ट कहती है कि पाकिस्तान की GDP 2025-26 में 3.1% रहने की उम्मीद है, जो 2023-24 में सिर्फ 2.5% थी। यानी सुधार की रफ्तार बेहद धीमी है।
Moody’s की रिपोर्ट, पाकिस्तान का भविष्य संकट में
IMF ने मार्च 2025 में चेताया था कि अगर पाकिस्तान (Pakistan) ने राजकोषीय सुधारों और टैक्स बढ़ोतरी में ढिलाई दी, या फिर राजनीतिक अस्थिरता बनी रही, तो देश की ‘मैक्रो इकनॉमिक स्टेबिलिटी’ फिर से डगमगा सकती है। Moody’s ने दो टूक कहा कि यदि भारत के साथ तनाव बढ़ता है, तो पाकिस्तान की ग्रोथ रुक सकती है और उसका अंतरराष्ट्रीय आर्थिक भरोसा खत्म हो सकता है।
भारत से युद्ध मतलब पाकिस्तान के लिए ‘आर्थिक आत्महत्या’ (India Pakistan War)
भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर है। लेकिन क्या पाकिस्तान, भारत से लंबा युद्ध (India Pakistan War) लड़ने की स्थिति में है? विशेषज्ञों का मानना है कि बिल्कुल नहीं। पाकिस्तान की कमर युद्ध से टूट जाएगी।
बाहरी कर्ज का बोझ : पाकिस्तान को आने वाले महीनों में भारी कर्ज चुकाना है, और युद्ध की स्थिति में उसे और पैसा उधार लेना पड़ेगा, जो IMF जैसे संस्थानों की शर्तों के विरुद्ध होगा।
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विदेशी मुद्रा भंडार संकट : युद्ध की स्थिति में ऊर्जा, दवाइयों और हथियारों की भारी जरूरत पड़ेगी, लेकिन पाकिस्तान का मुद्रा भंडार महज तीन महीने की जरूरतें ही पूरा कर सकता है।
आर्थिक संरचना की कमजोरी : पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले से ही कृषि और ऊर्जा के संकट से जूझ रही है। 40% मजदूर कृषि पर निर्भर हैं, और भारत द्वारा सिंधु जल संधि को स्थगित करना पाकिस्तान की खाद्य सुरक्षा के लिए खतरा है।
ऊर्जा संकट और महंगाई : पाकिस्तान की ऊर्जा नीति आयात-आधारित है। महंगे इंधन की वजह से न केवल व्यापारिक लागत बढ़ी है, बल्कि सरकारी सब्सिडी का बोझ भी असहनीय हो चुका है। युद्ध में इन हालातों का और भी शोषण होगा।
IMF और अन्य फाइनेंसरों की नाराजगी : अगर पाकिस्तान (Pakistan) युद्ध में उलझता है, तो IMF और विश्व बैंक जैसे संस्थानों से मदद मिलनी और मुश्किल हो जाएगी, जिससे देश दिवालियापन की कगार पर जा सकता है।
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भारत की अर्थव्यवस्था कहीं ज्यादा मजबूत और विविधतापूर्ण है। Moody’s के मुताबिक भारत की विकास दर तेज बनी हुई है, और घरेलू खपत व निवेश स्थिर हैं। युद्ध की स्थिति में रक्षा खर्च बढ़ सकता है, जिससे भारत की वित्तीय मजबूती थोड़ी प्रभावित हो सकती है, लेकिन अपने पड़ोसी के मुकाबले वह कहीं अधिक स्थिर और आत्मनिर्भर है।
IMF, वर्ल्ड बैंक और अन्य संस्थानों को अब तय करना है कि क्या वे एक ऐसे मुल्क को बार-बार आर्थिक जीवनदान देते रहेंगे, जो उसकी ही शर्तों के विरुद्ध जाकर आतंक और युद्ध का रास्ता चुनता है?



