
Jharkhand Student Protest : झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्रों ने सोमवार को विधानसभा मार्च किया। रांची में विधानसभा के पास छात्रों ने बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश की, जिसके बाद उनकी पुलिस से झड़प हो गई। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए वॉटर कैनन, आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया।
प्रदर्शन के बीच झारखंड विधानसभा की कार्यवाही भी दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई। दूसरी ओर, भर्ती परीक्षा में अनियमितताओं की जांच कर रही CID ने झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के पूर्व चेयरमैन एल. खियांग्ते को गिरफ्तार किया है। इससे छात्रों के आंदोलन को और धार मिल गई है (Jharkhand Student Protest)।
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विधानसभा मार्च के दौरान क्या हुआ?
हजारों की संख्या में नौकरी के अभ्यर्थी और छात्र भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं के खिलाफ विधानसभा मार्च कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने जब विधानसभा परिसर की ओर बढ़ने की कोशिश की तो पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बैरिकेडिंग की।
रांची सिटी एसपी पारस राणा के मुताबिक, प्रदर्शन में करीब 90 प्रतिशत छात्र शांतिपूर्ण तरीके से शामिल थे, लेकिन कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस और अपने प्रतिनिधियों की अपील नहीं मानी। एसपी ने आरोप लगाया कि करीब 700 से 1,000 प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग तोड़ दी और उसे धकेलते हुए तीन पुलिसकर्मियों को कुचल दिया (Jharkhand Student Protest)।
पुलिस का यह भी दावा है कि प्रदर्शनकारियों की ओर से पुलिस बल पर पत्थर फेंके गए। इसके बाद भी पुलिस ने संयम बरता और सीमित समय के लिए ही बल प्रयोग किया।
छात्र नेता ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने सरकार पर आंदोलन को दबाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि नौ दिन की भूख हड़ताल के बाद भी वह एम्बुलेंस से विधानसभा मार्च में पहुंचे और स्ट्रेचर पर आंदोलन का हिस्सा बने (Jharkhand Student Protest)।
महतो ने कहा कि छात्रों की मांगों को लेकर सरकार के साथ तीन दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन अब तक समाधान नहीं निकला है। उन्होंने दावा किया कि सरकार छात्रों की आवाज दबाने के लिए पुलिस का इस्तेमाल कर रही है।
उन्होंने आंदोलन जारी रखने का ऐलान करते हुए कहा कि यह अब केवल छात्रों का आंदोलन नहीं बल्कि जन-आंदोलन बन चुका है। महतो ने कहा, ‘युवा शब्द का उल्टा वायु होता है और वायु को कोई नहीं रोक सकता (Jharkhand Student Protest)।’
JPSC के पूर्व चेयरमैन एल. खियांग्ते गिरफ्तार
इस पूरे विवाद के बीच JPSC के पूर्व चेयरमैन एल. खियांग्ते की गिरफ्तारी ने मामले को और गंभीर बना दिया है। CID ने उन्हें भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच के सिलसिले में गिरफ्तार किया है।
CID के अतिरिक्त महानिदेशक मनोज कौशिक के अनुसार, खियांग्ते से 28 जुलाई से चार बार पूछताछ की जा चुकी थी। उनकी गिरफ्तारी के साथ इस मामले में CID द्वारा गिरफ्तार किए गए लोगों की संख्या 20 हो गई है (Jharkhand Student Protest)।
CID ने JPSC मुख्यालय के अलावा खियांग्ते के सरकारी आवास समेत कई स्थानों पर तलाशी भी ली थी।
14वीं JPSC परीक्षा के परिणाम पर विवाद
विवाद की प्रमुख वजह JPSC की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा (PT) के परिणाम और परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियां हैं। अभ्यर्थियों ने परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए लंबे समय से आंदोलन किया है (Jharkhand Student Protest)।
छात्रों का आरोप है कि परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताओं के कारण योग्य अभ्यर्थियों के साथ अन्याय हुआ है। इसी को लेकर वे लगातार सरकार और JPSC के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।
हालांकि, पूरे मामले में जांच अभी जारी है और आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
एल. खियांग्ते ने क्यों दिया था इस्तीफा?
एल. खियांग्ते झारखंड के मुख्य सचिव पद से रिटायर होने के बाद पिछले साल फरवरी में JPSC के चेयरमैन नियुक्त किए गए थे। उन्होंने 22 जुलाई को JPSC चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया था (Jharkhand Student Protest)।
उन्होंने अपना इस्तीफा ई-मेल के जरिए राजभवन भेजा था, जिसे राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने स्वीकार कर लिया था। खियांग्ते ने कहा था कि उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए अपनी इच्छा से इस्तीफा दिया।
उनका इस्तीफा ऐसे समय हुआ जब 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम को लेकर अभ्यर्थियों का विरोध तेज था।



