

उत्तराखंड स्थित बदरीनाथ धाम में दो दिवसीय नर-नारायण जयंती (Nar Narayan Jayanti) महोत्सव श्रद्धा और परंपरा के साथ मनाया जा रहा है। पहले दिन प्रातः भगवान बदरीविशाल के मुख्य पुजारी अमरनाथ नम्बूदरी जी ने भगवान नर-नारायण की दर्शन मूर्ति का सविधि पूजन किया और भोग अर्पित कर विशेष उपचार समर्पित किए।
इसके बाद परंपरानुसार भगवान नर-नारायण पालकी में विराजमान होकर मंदिर की परिक्रमा करते हुए भक्तों संग अपनी माता मूर्तिदेवी के दर्शन हेतु पधारे। यह यात्रा आध्यात्मिक उल्लास और भक्ति से परिपूर्ण रही।
दूसरे दिन का विशेष आयोजन लीला दूंगी में होगा, जहां भगवान नारायण का अभिषेक पूजन किया जाएगा। इसके उपरांत वह बदरीपुरी भ्रमण कर पुनः नारायण मंदिर के गर्भगृह में बिराजमान होंगे।
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परंपरा और ज्योतिषीय महत्व
यह भव्य उत्सव हर वर्ष उस दिन आयोजित होता है जब श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि हो, सूर्य कर्क राशि में स्थित हो और हस्त नक्षत्र हो। इसी विशेष संयोग में नर-नारायण जयंती (Nar Narayan Jayanti) का पर्व मनाया जाता है। यह पर्व उस परम तपस्वी रूप की स्मृति है, जब भगवान नर-नारायण जनकल्याण के लिए बदरिकाश्रम में अनंतकाल से तपस्या कर रहे हैं।
आशीर्वचन और उपस्थित संतगण
Nar Narayan Jayanti के इस पावन अवसर पर उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठ के परमाचार्य, जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज (1008) ने मुंबई स्थित अपने चातुर्मास्य स्थल से भक्तों को वीडियो संदेश द्वारा शुभकामनाएं दीं और सभी को धर्म और सेवा के पथ पर अग्रसर रहने का संदेश दिया।
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इस महोत्सव (Nar Narayan Jayanti) में मुख्य पुजारी अमरनाथ नम्बूदरी, नायब रावल, धर्माधिकारी राधाकृष्ण थपलियाल, जगद्गुरु शंकराचार्य महाराज के प्रतिनिधि स्वामी प्रत्यक्चैतन्यमुकुन्दानन्द गिरि, मंदिर समिति के पदाधिकारी, और सैकड़ों श्रद्धालु भक्तगण उपस्थित रहे।



