
China one child policy failure : चीन ने 1 जनवरी 2026 से कंडोम और अन्य गर्भनिरोधक साधनों पर 13 प्रतिशत वैल्यू-एडेड टैक्स (VAT) लगाने का फैसला किया है। तीन दशक बाद लिया गया यह कदम टैक्स सुधार नहीं है। असल में चीन अपनी गलतियां सुधारने की कोशिश कर रहा है। टैक्स लगाना बताता है कि चीन ने अपने जनसंख्या संकट को स्वीकार कर लिया है और इसकी वजह है वन चाइल्ड पॉलिसी।
कैसे लागू हुई वन चाइल्ड पॉलिसी
1979 में चीन ने तेजी से बढ़ती आबादी को रोकने के लिए वन चाइल्ड पॉलिसी लागू की। इसके तहत ज्यादातर परिवारों को सिर्फ एक बच्चा पैदा करने की अनुमति थी। नियम तोड़ने पर भारी जुर्माना, नौकरी जाने का खतरा, और कई मामलों में जबरन गर्भपात और नसबंदी तक कराई गई।
सरकार को लगा कि इससे संसाधनों पर दबाव कम होगा और आर्थिक विकास तेज होगा। कुछ समय तक यह नीति सफल दिखी, लेकिन इसके दूरगामी असर विनाशकारी साबित हुए (China one child policy failure)।
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वन चाइल्ड पॉलिसी क्यों नाकाम हुई (China one child policy failure)
वन चाइल्ड पॉलिसी की सबसे बड़ी विफलता यह रही कि इसने जनसंख्या का प्राकृतिक संतुलन तोड़ दिया।
पहला, चीन में बुज़ुर्गों की संख्या तेजी से बढ़ी, जबकि कामकाजी उम्र के युवाओं की संख्या घटती चली गई। आज स्थिति यह है कि कम युवा ज्यादा बुज़ुर्गों का बोझ उठा रहे हैं।
दूसरा, लड़कों को प्राथमिकता देने की सामाजिक सोच के कारण लिंग अनुपात बिगड़ गया। दशकों तक कन्या भ्रूण हत्या और लैंगिक भेदभाव चलता रहा, जिससे आज चीन में करोड़ों पुरुषों को जीवनसाथी तक नहीं मिल पा रहा (China one child policy failure)।
तीसरा, एक-बच्चे वाले परिवारों ने बच्चों को लेकर अत्यधिक खर्च और प्रतिस्पर्धा का माहौल बना दिया। नतीजा यह हुआ कि अगली पीढ़ी शादी और बच्चे से डरने लगी। आज के युवा बच्चों को खर्च और जिम्मेदारी के रूप में देखते हैं।
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नीति बदली, लेकिन सोच नहीं बदली
2016 में चीन ने दो बच्चों की अनुमति दी और 2021 में इसे तीन कर दिया। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। जो पीढ़ी वन चाइल्ड पॉलिसी में बड़ी हुई, वह मानसिक रूप से छोटे परिवार की आदी हो चुकी थी।
सरकार ने अब बच्चों के लिए नकद सब्सिडी, IVF पर छूट, शादी पर छुट्टियां और चाइल्डकेयर सहायता जैसे उपाय शुरू किए हैं। इसके बावजूद जन्मदर लगातार नीचे बनी हुई है (China one child policy failure)।
2024 में चीन की जन्मदर सिर्फ 6.77 प्रति 1,000 लोग रही यानी एक हजार लोगों पर 7 से भी कम बच्चे, जो बेहद चिंताजनक है।
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अब ‘प्रोत्साहन’ से ‘दबाव’ की ओर
कंडोम और गर्भनिरोधक पर टैक्स लगाने का फैसला इसी हताशा का संकेत है। सोशल मीडिया पर लोग इसे सरकार की जबरन संतान नीति की वापसी के रूप में देख रहे हैं (China one child policy failure)।
कुछ इलाकों में महिलाओं से मासिक धर्म की जानकारी मांगी जा रही है। युनान प्रांत में स्थानीय प्रशासन ने महिलाओं से आखिरी पीरियड की तारीख रिपोर्ट करने को कहा, ताकि गर्भवती महिलाओं की पहचान की जा सके।
यह दिखाता है कि चीन अब प्रोत्साहन से आगे बढ़कर दबाव की ओर बढ़ रहा है। जैसे कभी एक बच्चा पैदा करने का दबाव था, वैसे ही अब ज्यादा बच्चे पैदा करने का दबाव डाला जा रहा है।
क्या कंडोम टैक्स से जन्मदर बढ़ेगी?
विशेषज्ञ मानते हैं कि नहीं। कंडोम और गर्भनिरोधक महंगे होने से लोगों के बच्चे पैदा करने के फैसले नहीं बदलेंगे। असल समस्या आर्थिक असुरक्षा, महंगी शिक्षा, करियर दबाव और शहरी जीवनशैली है। टैक्स नीति से इसे हल नहीं किया जा सकता।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस कदम से सरकार को बहुत ज्यादा टैक्स भी नहीं मिलने वाला। अनुमान है कि इससे सालाना लगभग 5 बिलियन युआन अतिरिक्त राजस्व आएगा, जो चीन के कुल बजट 22 ट्रिलियन युआन की तुलना में नगण्य है।
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