

ऑस्ट्रेलियाई कोच जस्टिन लैंगर ने खुद 105 टेस्ट मैच खेले हैं, लेकिन वह भी हैरान थे। सिर्फ एक खिलाड़ी ने उनकी पूरी रणनीति तबाह कर दी। कोई बल्लेबाज़ इतनी ज्यादा बॉल कैसे खेल सकता है, वह भी हर पारी में। 2018 की उस सीरीज में चेतेश्वर पुजारा (Cheteshwar Pujara) ने 12 सौ से अधिक गेंदों का सामना किया और ऑस्ट्रेलिया में पहली टेस्ट सीरीज जीत की बुनियाद बने।
इससे पहले लैंगर के देश में लिटिल मास्टर सुनील गावसकर गए थे। मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंडुलकर ने दौरा किया। द वॉल के नाम से मशहूर राहुल द्रविड़ गए। यहां तक कि जिन लक्ष्मण को कंगारूओं ने ही वेरी-वेरी स्पेशल कहा था, वह भी टीम इंडिया के साथ रहे। लेकिन कभी भी भारत ऑस्ट्रेलियाई जमीन पर टेस्ट सीरीज नहीं जीत सका था। यह खिलाड़ी न लिटिल मास्टर था और न ही मास्टर ब्लास्टर, फिर भी उसने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ऑस्ट्रेलिया में पहली टेस्ट सीरीज जीत की बुनियाद रख दी।
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अब उन पुजारा (Cheteshwar Pujara) की कमी खूब खलेगी ऑस्ट्रेलिया में। भारतीय टेस्ट क्रिकेट (Indian Test Cricket) के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाजों में शुमार चेतेश्वर पुजारा (Cheteshwar Pujara) ने रविवार को सभी फॉर्मेट्स से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया।
37 साल के पुजारा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (Twitter) पर पोस्ट लिखकर बताया कि भारतीय जर्सी पहनकर मैदान पर उतरना और राष्ट्रगान गाना उनके जीवन का सबसे बड़ा गर्व रहा है। उन्होंने लिखा – जैसा कहा जाता है कि हर अच्छी चीज का अंत होता है, वैसे ही मैंने कृतज्ञता के साथ सभी फॉर्मेट्स से संन्यास लेने का फैसला किया है।
पुजारा का क्रिकेट सफर (Cheteshwar Pujara Test Career)
चेतेश्वर पुजारा ने साल 2010 में ऑस्ट्रेलिया (Australia) के खिलाफ टेस्ट डेब्यू किया था। उन्होंने भारत के लिए 103 टेस्ट मैच खेले और 7,195 रन बनाए। उनका औसत 43.61 रहा, जिसमें 19 शतक और 35 अर्धशतक शामिल हैं।
पुजारा का सर्वोच्च स्कोर 206 रन रहा। इसके अलावा उन्होंने 5 वनडे (ODI) मैच भी खेले, जिनमें उन्होंने 51 रन बनाए। हालांकि सीमित ओवरों में उन्हें ज्यादा मौके नहीं मिले, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में उनकी पहचान एक दीवार (The Wall) की तरह बनी रही।
पुजारा (Cheteshwar Pujara) की बल्लेबाजी की सबसे बड़ी खूबी थी उनकी धैर्य और तकनीक। ऑस्ट्रेलिया की तेज पिचों (Australian Pitches) और इंग्लैंड के स्विंग भरे हालातों में उन्होंने भारतीय टीम की रीढ़ का काम किया।
उन्होंने अकेले ही कई मौकों पर भारतीय पारी को संभाला और टीम को जीत की राह दिखाई।
खासतौर पर 2018-19 की ऑस्ट्रेलिया टेस्ट सीरीज (India vs Australia Test Series) में उनका योगदान ऐतिहासिक रहा, जब भारत ने पहली बार ऑस्ट्रेलिया को उनकी धरती पर हराया। उस सीरीज में पुजारा ने तीन शतक लगाए और Man of the Series बने।
यही कारण है कि क्रिकेट विशेषज्ञ मानते हैं कि जब भारत अगली बार ऑस्ट्रेलिया दौरे पर जाएगा, तो पुजारा की कमी बेहद खलेगी।
आखिरी टेस्ट और विदाई (Pujara Last Test Match)
चेतेश्वर पुजारा ने भारत के लिए आखिरी टेस्ट मैच 2023 वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल (World Test Championship Final 2023) में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेला था। उसके बाद से वह टीम से बाहर रहे, लेकिन घरेलू क्रिकेट में लगातार प्रदर्शन करते रहे।
पुजारा (Cheteshwar Pujara) ने संन्यास लेते हुए अपने साथियों, कोचों और फैन्स का शुक्रिया अदा किया। उनके अनुसार भारतीय क्रिकेट (Indian Cricket) के लिए खेलना उनके जीवन का सबसे बड़ा सम्मान था।
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चेतेश्वर पुजारा को हमेशा एक ऐसे बल्लेबाज के रूप में याद किया जाएगा, जिसने तेज क्रिकेट के दौर में भी सहनशीलता (Resilience) और धैर्य को महत्व दिया।
जिसने टीम इंडिया को विदेशों में ऐतिहासिक जीत दिलाने में अहम योगदान दिया। और जिसने साबित किया कि टेस्ट क्रिकेट में आज भी टेक्नीक और टाइमिंग की अहमियत बरकरार है।



