

Asia Cup : Sea Squirt का नाम आपने कभी डिस्कवरी चैनल के किसी शो में या कहीं सुना हो सकता है। माना जाता है कि इसकी याददाश्त सबसे कम होती है – कह सकते हैं कि होती ही नहीं।
यह समुद्री जीव अपने जीवन की शुरुआत में छोटा-सा लार्वा होता है। तैरता रहता है पानी में। इस दौरान इसमें एक सरल नर्वस सिस्टम होता है, जिसे दिमाग का प्रारंभिक रूप कह सकते हैं।
तैरते-तैरते फिर यह लार्वा किसी चट्टान पर चिपक जाता है और बाकी जीवन उसी तरह से गुजार देता है। हैरत की बात यह है कि बड़ा होने के दौरान यह अपना खुद का दिमाग खा जाता है। इस तरह ज्यादातर जीवन यह बिना दिमाग के गुजारता है। न दिमाग और न याददाश्त।
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) को देखकर Sea Squirt की याद आती है – कम से कम याददाश्त के मामले में। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान यह बात उठी थी कि अब पाकिस्तान के साथ रहे-सहे क्रिकेट संबंध भी तोड़ लेने चाहिए। तब सुनील गावस्कर समेत कई खिलाड़ियों ने यह बात कही थी।
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यह भी कहा गया कि मोहसिन नकवी पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के अध्यक्ष होने के साथ वहां के गृह मंत्री भी हैं। यह सीधे-सीधे राजनीतिक दखल है और BCCI ऐसे किसी इवेंट का हिस्सा नहीं बनेगा, जिसमें नकवी शामिल होंगे।
नकवी ने ACC की मीटिंग बांग्लादेश में रख दी, तो भारतीय क्रिकेट बोर्ड की तरफ से आपत्ति जताई गई और कहा गया कि उसकी तरफ से कोई भी बैठक में नहीं जाएगा। लेकिन फिर BCCI की ओर से राजीव शुक्ला वर्चुअली इसमें शामिल हुए और शामिल ही नहीं हुए, हामी भी भर आए कि भारत एशिया कप (Asia Cup) में खेलेगा। यही नहीं, इवेंट न्यूट्रल वेन्यू पर होगा।
अब मोहसिन नकवी (Mohsin Naqvi) ने ट्विटर पर बताया है कि एशिया कप (Asia Cup) सितंबर में होगा।
सवाल है कि BCCI के सामने क्या मजबूरी थी? क्या बोर्ड को याद नहीं कि ऑपरेशन सिंदूर के तहत जब भारत ने पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था, तो किस तरह से वहां के क्रिकेटर अपने आतंकवादियों के सपोर्ट में खड़े हो गए थे?
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Asia Cup भारत के बिना नहीं हो सकता। कहा जा रहा है कि भारत-पाकिस्तान (India-Pakistan Cricket) मैच के बिना भी Asia Cup नहीं हो सकता। लेकिन इसकी जरूरत ही क्या है? क्या Asia Cup भारत से ज्यादा अहम है?
यह फैक्ट है कि भारत को एशिया कप (Asia Cup) से कमाई नहीं होती। वह अपना रेवेन्यू दूसरे सदस्य देशों में बांट देता है। अगर BCCI को एशियन देशों की मदद करनी है, तो वह एक दूसरा टूर्नामेंट खेल सकता था। एशिया कप (Asia Cup) के लिए हामी भरकर उसने पाकिस्तान को कमाई का मौका दे दिया है।
भारत सरकार नहीं चाहती कि पाकिस्तान के साथ किसी भी तरह का संबंध रखा जाए। क्या सरकार ने BCCI को इससे छूट दे रखी है?
हमारे क्रिकेटर और कुछ नहीं तो पाकिस्तान के खिलाड़ियों से ही सबक ले लेते, जिन्होंने नैतिकता को ताक पर रखते हुए अपने देश की आतंकी नीतियों को नजरअंदाज किया और खुलकर सड़कों पर उतरे। क्या आप शाहिद आफरीदी का रोड शो भूल गए?
यकीन है कि आप नहीं भूले होंगे। हां, BCCI का नहीं कह सकते।
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