

हिंदू धर्म में कोई भी पूजा या काम शुरू करने से पहले विनायक यानी श्री गणेश (Lord Ganesh) की पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि भगवान गणेश का नाम लेकर शुरुआत करने से हर काम सफल होता है।
वैदिक ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, भगवान श्री गणेश (Lord Ganesh) की पूजा मनुष्य को विभिन्न समस्याओं से मुक्त कर और उनके आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त करती है। आइए जानते हैं कि गणेश की किस-किस तरह की मूर्ति पूजा प्रचलित है और उस पूजा से क्या फल प्राप्त होता है।
श्वेतार्क गणपति
सफेद आक नामक पौधे की जड़ से तैयार इस गणेश प्रतिमा (Lord Ganesh) की पूजा खास तौर पर गणेश चतुर्थी के मौके पर की जाती है। तंत्र साधना में इसका विशेष महत्व है। श्वेतार्क गणपति को साक्षात गणेश माना जाता है। अगर कोई जातक आर्थिक तंगी से गुजर रहा हो, तो शुक्ल पक्ष के किसी भी बुधवार को या गणेश चतुर्थी के दिन श्वेतार्क गणपति की स्थापना कर रोज देशी घी के दीप जलाएं।
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भगवान गणेश (Lord Ganesh) की कृपा हुई, तो कुछ दिन में शुभ फल पाएंगे। इस पूजा के जरिए वास्तुदोष दूर करना संभव है। वशीकरण, नजर दोष, गर्भ रक्षा, शत्रु और रोग से मुक्ति और मानसिक शांति के लिए यह पूजा की जा सकती है।
लक्ष्मी गणेश महायंत्र
अगर कोई जातक आर्थिक तंगी या मियादी बीमारी से जूझ रहा है, तो लक्ष्मी-गणेश महायंत्र (Laxmi Ganesh Mahayantra) की पूजा करने से भगवान श्री गणेश के साथ माता लक्ष्मी का आशीर्वाद भी मिलेगा। इस महायंत्र की पूजा से जातक के लिए ऋद्धि, सिद्धि और संपत्ति प्राप्ति का पथ सुगम होगा। इस यंत्र को गणेश चतुर्थी, दशहरा या दीपावली के दिन चांदी के आसन पर बिठाकर जाग्रत करें और फिर विधिपूर्वक पूजा की जगह पर स्थापित करें। इस यंत्र की रोज पूजा करने से भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की कृपा होगी।
स्फटिक गणेश
स्फटिक एक रत्न है, जिसे विभिन्न कारणों से धारण किया जाता है। इसे अंग्रेजी में क्रिस्टल भी कहते हैं। मनोयोग बढ़ाने, कुंडलिनी जागरण, बाधाओं को हटाने, मन की बेचैनी और अस्थिरता से मुक्ति के यह काम आता है। गणेश चतुर्थी या दीपावली के दिन स्फटिक की गणेश प्रतिमा (Lord Ganesh) को घर या दफ्तर में स्थापित करें।
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इस मूर्ति को विधिपूर्वक स्थापित कर नियमित पूजा करने से सभी प्रकार के बाधा-विघ्न का नाश होता है और व्यक्ति सात्विक भाव से जीवन के रास्ते पर आगे बढ़ता है। स्फटिक गणेश प्रतिमा की पूजा से कई तरह के मानसिक रोगों से मुक्ति मिलती है, कर्म सही दिशा में होते हैं, जिसके परिणामस्वरूप जीवन सफल होता है।
पन्ना, मरगज के गणेश
पन्ना का एक उपरत्न मरगज है, जिसे अंग्रेजी में जेड स्टोन भी कहते हैं। पन्ना या मरगज का उपयोग वाणी दोष निवारण, मानसिक रोग से मुक्ति, मन की बेचैनी, ऊहापोह और उन्माद से छुटकारे के लिए किया जाता है।
इन समस्याओं के रहने पर गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi) या दीपावली के दिन पन्ना या मरगज रत्न से तैयार गणेश प्रतिमा (Lord Ganesh) को घर या दफ्तर में पूजा के स्थान पर स्थापित करें। घर में नियमित पूजा से या दफ्तर में रखने भर से तमाम तरह की बाधा-विपत्तियां दूर होंगी और जीवन में खुशहाली आएगी।
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