
हिंदू धर्म में हर महीने आने वाली कालाष्टमी (Masik Kalashtami) भगवान काल भैरव की आराधना के लिए सबसे महत्वपूर्ण तिथियों में मानी जाती है। यह व्रत हर चंद्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान काल भैरव की पूजा करने और व्रत रखने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं, भय समाप्त होता है और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
जुलाई की मासिक कालाष्टमी (Masik Kalashtami) 7 जुलाई, मंगलवार को पड़ रही है। मंगलवार भगवान भैरव का प्रिय दिन माना जाता है, इसलिए इस बार की कालाष्टमी का महत्व और भी बढ़ गया है। यदि आप कालाष्टमी का व्रत रखने जा रहे हैं, तो इसके शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और धार्मिक महत्व को जानना आवश्यक है।
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अष्टमी (Masik Kalashtami) तिथि का समय
- अष्टमी तिथि प्रारंभ : 7 जुलाई, दोपहर 1:25 बजे
- अष्टमी तिथि समाप्त : 8 जुलाई, दोपहर 12:22 बजे
उदयातिथि के अनुसार 7 जुलाई को कालाष्टमी का व्रत और पूजा की जाएगी।
कालाष्टमी क्या है?
कालाष्टमी, जिसे काला अष्टमी (Masik Kalashtami) भी कहा जाता है, भगवान काल भैरव को समर्पित पर्व है। काल भैरव को भगवान शिव का उग्र और रक्षक स्वरूप माना जाता है। वह धर्म की रक्षा करने वाले, बुराइयों का नाश करने वाले और समय के अधिपति माने जाते हैं।
हर वर्ष कुल 12 मासिक कालाष्टमी आती हैं। इनमें मार्गशीर्ष माह की कालाष्टमी सबसे विशेष होती है, जिसे कालभैरव जयंती कहा जाता है। यदि कालाष्टमी रविवार या मंगलवार को पड़े तो उसका धार्मिक महत्व और अधिक माना जाता है।
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कालाष्टमी (Masik Kalashtami) पर पूजा कैसे करें?
कालाष्टमी के दिन भक्त सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करते हैं और स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं। इसके बाद भगवान काल भैरव और भगवान शिव की पूजा की जाती है।
पूजा के दौरान भगवान को फूल, धूप, दीप, चंदन, फल और मिठाई अर्पित की जाती है। श्रद्धापूर्वक काल भैरव स्तोत्र, काल भैरव कथा और भगवान शिव के मंत्रों का जाप किया जाता है।
कई भक्त पूरे दिन उपवास रखते हैं और शाम के समय काल भैरव मंदिर जाकर विशेष आरती में शामिल होते हैं। कुछ श्रद्धालु पूरी रात जागरण करके भगवान शिव और काल भैरव का स्मरण करते हैं।
कालाष्टमी (Masik Kalashtami) के दिन किए जाने वाले प्रमुख अनुष्ठान
कालाष्टमी (Masik Kalashtami) के अवसर पर कुछ विशेष धार्मिक परंपराओं का पालन किया जाता है।
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- सूर्योदय से पहले स्नान कर व्रत का संकल्प लें।
- भगवान काल भैरव और भगवान शिव की विधिपूर्वक पूजा करें।
- काल भैरव कथा और शिव मंत्रों का जाप करें।
- दिनभर उपवास रखें और सात्विक जीवन अपनाएं।
- शाम को भैरव मंदिर जाकर दर्शन और आरती करें।
- पितरों की शांति के लिए श्रद्धापूर्वक पूजा करें।
- जरूरतमंदों और ब्राह्मणों को भोजन तथा दान दें।
- कुत्तों को भोजन अवश्य कराएं।
कालाष्टमी (Masik Kalashtami) पर कुत्ते को भोजन क्यों कराया जाता है?
धार्मिक मान्यता के अनुसार कुत्ता भगवान काल भैरव का वाहन है। इसलिए कालाष्टमी (Masik Kalashtami) के दिन कुत्तों को भोजन कराना अत्यंत शुभ माना जाता है।
भक्त इस दिन कुत्तों को दूध, दही, रोटी, मिठाई या अन्य भोजन खिलाते हैं। माना जाता है कि ऐसा करने से भगवान काल भैरव प्रसन्न होते हैं और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
कालाष्टमी का धार्मिक महत्व
हिंदू धार्मिक ग्रंथों में कालाष्टमी (Masik Kalashtami) का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि भगवान काल भैरव की पूजा करने से व्यक्ति को भय, नकारात्मक ऊर्जा, शत्रुओं और संकटों से रक्षा मिलती है।
‘काल’ का अर्थ समय और ‘भैरव’ भगवान शिव का उग्र स्वरूप है। इसलिए भगवान काल भैरव को समय का स्वामी भी कहा जाता है। श्रद्धा से उनकी पूजा करने वाले भक्तों को साहस, सुरक्षा, सफलता और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
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यह भी माना जाता है कि कालाष्टमी के दिन किए गए जप, तप, दान और पूजा का फल सामान्य दिनों की तुलना में अधिक मिलता है।
भगवान काल भैरव की कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार एक बार ब्रह्मा, विष्णु और भगवान शिव के बीच श्रेष्ठता को लेकर चर्चा चल रही थी। इसी दौरान ब्रह्मा के अहंकार से भगवान शिव अत्यंत क्रोधित हो गए। उनके क्रोध से भगवान काल भैरव प्रकट हुए और उन्होंने ब्रह्मा का पांचवां सिर अलग कर दिया।
इसके बाद भगवान शिव के इसी उग्र और न्यायप्रिय स्वरूप की पूजा काल भैरव के रूप में होने लगी। मान्यता है कि भगवान काल भैरव धर्म की रक्षा करते हैं और अधर्म का नाश करते हैं। जो भक्त श्रद्धा से उनकी पूजा करते हैं, उनके जीवन के संकट दूर होते हैं और उन्हें भगवान शिव का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कालाष्टमी (Masik Kalashtami) का व्रत रखने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं। कहा जाता है कि इससे भय और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है, पापों का क्षय होता है, मन को शांति मिलती है और परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है। साथ ही भगवान शिव और काल भैरव की कृपा से जीवन की बाधाएं दूर होने की मान्यता भी है।



