
Fake News on Social Media : सोशल मीडिया के दौर में झूठी खबरें (Fake News) और अफवाहें कितनी तेजी से फैलती हैं, इसका ताजा उदाहरण गोवा से सामने आया है। गोवा पुलिस ने दिल्ली निवासी अक्षय वशिष्ठ (Akshay Vashisth) को गिरफ्तार किया है। उस पर आरोप है कि उसने अपने फेसबुक चैनल पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसका शीर्षक था – गोवा का हॉन्टेड एयरपोर्ट (Goa ka haunted airport)।
इस वीडियो में मनोहर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, मोपा (Manohar International Airport, Mopa) के बारे में भ्रामक और अंधविश्वास फैलाने वाली बातें कही गई थीं। पुलिस के मुताबिक इस तरह का कंटेंट न केवल अफवाह फैलाता है, बल्कि लोगों में डर और असुरक्षा की भावना भी पैदा कर सकता है। (Fake News on Social Media)
कैसे हुआ खुलासा?
पुलिस मुख्यालय, पणजी में सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेल के कांस्टेबल सुरज शिरोडकर ने इस वीडियो को सबसे पहले नोटिस किया और शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में कहा गया कि वीडियो में झूठे और दुर्भावनापूर्ण आरोप लगाए गए थे, जो पब्लिक अलार्म पैदा करने के लिए बनाए गए थे। (Fake News on Social Media)
इसके बाद मोपा एयरपोर्ट पुलिस स्टेशन में 15 सितंबर को मामला दर्ज किया गया। तकनीकी निगरानी से पता चला कि आरोपी दिल्ली में रहता है। इसके बाद PSI विराज सावंत और कांस्टेबल रविचंद्र बांदीवडकर की टीम दिल्ली पहुंची और द्वारका इलाके से वशिष्ठ को गिरफ्तार कर गोवा लाया गया। पूरी कार्रवाई पुलिस इंस्पेक्टर नारायण चिमुलकर की देखरेख में हुई।
सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने के दूसरे मामले
यह पहली बार नहीं है जब सोशल मीडिया पर किसी ने ‘हॉन्टेड’ या ‘भूतहा जगह’ (Fake News on Social Media) बताकर गलत सूचना फैलाई हो। कुछ महीने पहले, राजस्थान में एक यूट्यूबर को पुराने किले को ‘भूतिया जगह’ बताने और वहां शूटिंग करने के लिए पकड़ा गया था। इसी तरह, उत्तराखंड और हिमाचल में कई व्लॉगर्स को जंगलों और मंदिरों को ‘हॉन्टेड’ बताने पर चेतावनी दी गई है।
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दूसरे मामलों में भी देखा गया है कि लोग क्लिक और व्यूज पाने के लिए अंधविश्वास या डर फैलाने वाली बातें (Fake News on Social Media) कहते हैं, जो आम जनता में भ्रम और असुरक्षा पैदा कर सकती हैं। यही वजह है कि पुलिस और प्रशासन अब सोशल मीडिया कंटेंट पर ज्यादा सख्ती से नज़र रख रहा है।
क्यों जरूरी है सतर्कता?
डिजिटल युग में हर कोई फोन के जरिए कंटेंट क्रिएटर बन गया है। लेकिन यह जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी है। अगर गलत या भ्रामक जानकारी (Fake News on Social Media) फैलाई जाती है, तो इसका असर हजारों-लाखों लोगों तक पहुँचता है।
इसलिए कानून साफ कहता है कि यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर ऐसी पोस्ट करता है जो डर, अफवाह या पब्लिक अलार्म पैदा करे, तो उस पर कार्रवाई हो सकती है।



