
Karni Sena
आगरा (Karni Sena Protest in Agra) की सड़कों पर शनिवार को एक अनोखा दृश्य देखने को मिला। तलवारें लहराईं, नारे गूंजे, हाईवे थमा और भीड़ ने हजारों की संख्या में कानून-व्यवस्था को चुनौती दी। यह कोई ऐतिहासिक युद्ध नहीं था, बल्कि यह एक आधुनिक आक्रोश था करणी सेना (Karni Sena) का, जो भड़की थी सपा सांसद रामजी लाल सुमन (Ramji Lal Suman) के बयान से।
बात राणा सांगा (Rana Sanga) की जयंती की है। लेकिन जश्न से ज्यादा यह दिन बन गया आक्रोश और असहमति का प्रतीक। समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के राज्यसभा सांसद रामजी लाल सुमन (Ramji Lal Suman) के बयान से आक्रोशित क्षत्रिय समुदाय सड़कों पर उतर आया।
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तलवारें, लाठियां और नारों का प्रदर्शन
आगरा (Agra) के गढ़ी राम में आयोजित करणी सेना (Karni Sena) के कार्यक्रम के बाद भीड़ का रुख सांसद के घर की ओर मुड़ गया। शाम के पांच बजते-बजते, हजारों कार्यकर्ता हथियारों से लैस होकर आगरा हाईवे की ओर बढ़ चले। कुछ के हाथों में तलवारें थीं, तो कुछ लाठी-डंडों से लैस थे। कुछ ने तो बुलडोजर भी साथ ले लिया, एक प्रतीकात्मक चेतावनी जैसा।
हाईवे पर गाड़ियों की रफ्तार थम गई। लोग जहां थे, वहीं फंसे रह गए। सड़क पर सिर्फ भीड़ थी, और हवा में सिर्फ एक ही स्वर, ‘माफी नहीं, हड्डी तोड़ कुटाई होगी!’ यह शब्द थे करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राज शेखावत के, जिन्होंने मंच से ऐलान किया कि अब सहनशक्ति की सीमा पार हो चुकी है।
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पुलिस प्रशासन की परीक्षा
पुलिस प्रशासन ने कोशिश तो की ताकि मामला शांत रहे, लेकिन हालात तेजी से बेकाबू होते चले गए। जाम हटाने में पुलिस के पसीने छूट गए। सपा सांसद रामजी लाल सुमन (Ramji Lal Suman) के आवास के बाहर सुरक्षा कड़ी कर दी गई। हथियारबंद जवान, क्रेनों से घिरे रास्ते, और हर नुक्कड़ पर पुलिस की तैनाती, यह सब दिखा।
पुलिस के मुताबिक, त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। 24 स्थानों पर बैरियर लगाए गए हैं और ड्रोन से पूरे इलाके पर निगरानी रखी जा रही है। लेकिन जनता की भीड़ और गुस्से का कोई बैरियर नहीं होता।
सांसद रामजी लाल सुमन का रुख
इस पूरे घटनाक्रम पर खुद रामजी लाल सुमन (Ramji Lal Suman) ने दो टूक कह दिया, ‘माफी का सवाल ही नहीं उठता।’ यह बयान आग में घी डालने जैसा साबित हुआ। करणी सेना (Karni Sena) के नेताओं ने इसे और उकसावे का कारण बना लिया।
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अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) की चेतावनी
जब मामला तूल पकड़ने लगा, तो समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने भी मोर्चा संभाला। उन्होंने स्पष्ट कहा,
‘रामजी लाल सुमन का अपमान समाजवादी पार्टी कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। अगर सरकार ने खुली छूट दे रखी है, तो इसके लिए वही जिम्मेदार है।’
इतना ही नहीं, उन्होंने इटावा में मीडिया से कहा, ‘अगर कोई हमारे कार्यकर्ता या सांसद का अपमान करेगा, तो हम उनके साथ खड़े दिखाई देंगे।’
दूसरी ओर, करणी सेना के अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने कहा,
‘अखिलेश यादव को क्षत्रिय समाज का एक भी वोट नहीं मिलेगा। यह हमारा वादा है।’
क्या कहा था सपा सांसद ने
रामजी लाल सुमन (Ramji Lal Suman) ने राज्यसभा में कहा था कि ‘बाबर को इब्राहिम लोधी को हराने के लिए राणा सांगा (Rana Sanga) लाया था। तो मुसलमान बाबर (Babur) की औलाद हैं और तुम गद्दार राणा सांगा की औलाद हो, ये हिंदुस्तान में तय हो जाना चाहिए। आप बाबर की तो आलोचना करते हैं, राणा सांगा की आलोचना नहीं करते।’ इस बयान के बाद से वह आलोचनाओं के केंद्र में आ गए हैं।
विरोध का विरोध भी
शनिवार का दिन विरोध के नाम रहा। रामजी लाल सुमन के बयान के खिलाफ करणी सेना (Karni Sena) सड़क पर थी, तो करणी सेना के उग्र विरोध-प्रदर्शन के खिलाफ कई लोगों ने सोशल मीडिया पर मोर्चा संभाला।
X पर कई यूजर्स ने लिखा कि खुलेआम तलवारें लहराना और पुलिस के सामने आक्रामक नारे लगाना कानून व्यवस्था के लिए सही नहीं है।



