
Book Review of Kasak Ki Kasauti : दो साल पहले की बात है, जब उत्तरकाशी की सिल्क्यारा टनल में तीन दर्जन से ज्यादा मजदूर फंस गए, तो यह बहस फिर शुरू हो गई कि पहाड़ों से कितनी छेड़छाड़ की जानी चाहिए। तब स्थानीय स्तर से यह आवाज भी उठी कि यह हादसा बाबा बौखनाग के प्रकोप की वजह से हुआ।
बाबा बौखनाग (Baba Baukhnag) को पहाड़ों का देवता माना जाता है और उनका प्रसिद्ध मंदिर सिल्क्यारा सुरंग के ठीक ऊपर घने जंगलों में स्थित है। स्थानीय लोगों का बाबा बौख नाग पर गहरा विश्वास है, वे उन्हें अपना ईष्ट देव और इस पूरे इलाके का रक्षक मानते हैं।
कहा जाता है कि केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि दूर-दूर के राज्यों से भी लोग यहां बाबा की पूजा करने आते हैं। मान्यता है कि जो श्रद्धालु नंगे पैर मंदिर तक पहुंचते हैं, बाबा उनकी हर मनोकामना पूरी करते हैं और उनकी खाली झोली भर देते हैं।
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बाबा बौखनाग को इस क्षेत्र की तीन पट्टियों का देवता माना जाता है। मंदिर में उनकी प्रतिमा नागराज के रूप में विराजमान है और भक्त बड़ी श्रद्धा से उनका दर्शन करते हैं।
कफनौल गांव बाबा बौखनाग की छत्रछाया में ही पड़ता है। इसी गांव के रहने वाले हैं प्रखर जन पत्रकार प्रेम पंचोली।
पहाड़ों को लेकर जो चिंता दशकों से उठाई जा रही है, प्रेम अपनी लेखनी से उसी को आवाज दे रहे हैं। अब उनकी एक नई किताब (Book Review of Kasak Ki Kasauti) आने वाली है। यह पहले पब्लिश हुई ‘कसक की कसौटी’ का दूसरा संस्करण आने को है। इस किताब में प्रेम पंचोली ने दलित व वंचित वर्ग के प्रमुख सवालों का सामना किया है। किताब में वंचित वर्ग के विविध सवाल उठाए गए हैं।
‘कसक की कसौटी’ (Book Review of Kasak Ki Kasauti) में प्रेम पंचोली ने विभिन्न अध्ययनों को शामिल कर यह साबित किया है कि उत्तराखंड में बन रही विभिन्न विकास योजनाओं में जब वंचित वर्ग की भूमि का अधिग्रहण किया जाता है तो उन्हें मुआवजा तक नहीं मिल पाता है।
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किताब (Book Review of Kasak Ki Kasauti) बताती है कि प्रदेश में आई बड़ी-बड़ी आपदाओं में भी वंचित वर्ग को मुआवजा नहीं दिया गया। जल, जंगल, जमीन व विकास परियोजनाओं और नीतिगत सवालों को आधार बनाकर लिखी गई यह किताब आपको बताती है कि समाज की मुख्यधारा से पीछे छूट गए लोगों को किस प्रकार नीतियों और विकास योजनाओं में पीछे धकेलने का काम किया जाता है।
किताब (Book Review) में मुख्य रूप में से आरक्षण, जमीन, भू-अधिग्रहण, आपदा राहत स्पेशल कंपोनेंट प्लान में भेदभाव के सवाल को उठाया गया है।



