
डॉ. बृजेश सती
आध्यात्मिक राजधानी कहलाने वाला उत्तराखंड अब महिला सुरक्षा को लेकर सवालों के घेरे में है। राष्ट्रीय वार्षिक रिपोर्ट एवं सूचकांक (नारी-2025) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, देहरादून को दस हिमालयी राज्यों की राजधानियों में महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित शहर बताया गया है (Nari index 2025 Dehradun)।
28 अगस्त को जारी इस सर्वे में देहरादून को सबसे निचले पायदान पर रखा गया (Nari index 2025 Dehradun)। यह चौंकाने वाला है क्योंकि उत्तराखंड को देश की आध्यात्मिक राजधानी कहा जाता है और यहां हरिद्वार-ऋषिकेश जैसे धार्मिक और योग केंद्र पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं।
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कभी शिक्षा और शांति के लिए प्रसिद्ध, अब अपराधों से घिरा देहरादून
देहरादून कभी अपने शांत वातावरण और स्कूली शिक्षा के लिए मशहूर था, लेकिन राजधानी बनने के बाद यहां आपराधिक घटनाओं का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। यही हाल पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला का भी है।
नारी-2025 रिपोर्ट में देश के कुल 31 शहरों को शामिल किया गया। इसमें 12,770 महिलाओं से सर्वे किया गया। रिपोर्ट बताती है कि महिला सुरक्षा के मामले में देहरादून का स्कोर 60.6 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय औसत 64.6 से कम है। इस तरह देहरादून की रैंक 31 में से 24वीं रही (Nari index 2025 Dehradun)।
देश का सबसे सुरक्षित और सबसे असुरक्षित शहर
रिपोर्ट के मुताबिक, महिलाओं के लिए सबसे सुरक्षित शहर नागालैंड की राजधानी कोहिमा है। वहीं, झारखंड की राजधानी रांची को देश का सबसे असुरक्षित शहर माना गया है।
देश के 9 असुरक्षित शहरों की सूची में देहरादून चौथे स्थान पर है। इस सूची में चेन्नई पहले, लुधियाना दूसरे, रायपुर तीसरे और देहरादून चौथे स्थान पर है। इनके बाद जयपुर, पटना, फरीदाबाद, दिल्ली, कोलकाता, श्रीनगर और रांची का नाम आता है।
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राज्य महिला आयोग ने रिपोर्ट पर उठाए सवाल
देहरादून को असुरक्षित शहर (Nari index 2025 Dehradun) बताने पर उत्तराखंड राज्य महिला आयोग ने कड़ा एतराज जताया है। आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने कहा कि यह सर्वे केवल 12,770 महिलाओं पर आधारित है, यानी औसतन हर शहर में करीब 400 महिलाओं पर। इतने छोटे सैंपल साइज के आधार पर किसी शहर की सुरक्षा व्यवस्था का आंकलन करना पूरी तरह गलत है।
उन्होंने यह भी साफ किया कि इस रिपोर्ट का राष्ट्रीय महिला आयोग से कोई संबंध नहीं है, बल्कि यह कंपनी का स्वयं का जुटाया गया डेटा है।
जनसंख्या और अपराध दर का विरोधाभास
रिपोर्ट पर सवाल उठाने का एक और कारण है – जनसंख्या। उदाहरण के लिए, मुंबई, दिल्ली और कोलकाता जैसे शहरों की आबादी करोड़ों में है। वहीं देहरादून की आबादी सिर्फ 10–11 लाख और शिमला की ढाई से तीन लाख के बीच है।
ऐसे में महिला सुरक्षा पर छोटे शहरों को बड़े महानगरों के बराबर आंकना तर्कसंगत नहीं माना जा सकता।
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उत्तराखंड और हिमाचल में अपराध दर बढ़ी
नारी-2025 रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में महिलाओं से जुड़े अपराधों की संख्या अन्य पर्वतीय राज्यों की तुलना में ज़्यादा है।
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में अपराधों की रिपोर्टिंग राजनीतिक और सामाजिक कारणों से कम होती है। वहीं, पूर्वोत्तर राज्यों – नागालैंड, मिजोरम, अरुणाचल, सिक्किम और त्रिपुरा – में अपराध दर राष्ट्रीय औसत से नीचे है। हालांकि, मणिपुर में 2023 के जातीय संघर्ष के दौरान महिलाओं के खिलाफ हिंसा और यौन अपराधों ने चिंता बढ़ाई थी।



