
Christmas ban history : आज क्रिसमस खुशियों, रोशनी, केक और तोहफों का त्योहार है। लेकिन इतिहास के पन्ने पलटें तो हैरानी होती है कि एक समय इंग्लैंड और अमेरिका में क्रिसमस मनाना अपराध माना जाता था। लोग अगर 25 दिसंबर को जश्न मनाते पकड़े जाते, तो जुर्माना और सजा तक हो सकती थी।
सवाल यह है कि आखिर क्रिसमस जैसा धार्मिक त्योहार अपराध क्यों बना? किसने इसे बैन किया और फिर यह बैन कैसे हटा?
इंग्लैंड में सत्ता पलटी तो सोच भी पलट गई
17वीं सदी में इंग्लैंड में गृह युद्ध चल रहा था। राजा चार्ल्स प्रथम की सत्ता डगमगा रही थी और चारों तरफ अस्थिरता का माहौल था। इसी उथल-पुथल के बीच एक समूह तेजी से ताकतवर हुआ, प्यूरिटन्स। ये लोग खुद को बाइबल का सबसे सच्चा अनुयायी मानते थे। इनके मुताबिक, ईश्वर की भक्ति में किसी भी तरह की मस्ती, दिखावा या उत्सव की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
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गृह युद्ध के बाद सत्ता जब Oliver Cromwell और प्यूरिटन संसद के हाथों में आई, तो क्रिसमस, ईस्टर और अन्य धार्मिक त्योहारों को लेकर विरोध बढ़ने लगा (Christmas ban history)।
प्यूरिटन्स की नजर में क्रिसमस कोई पवित्र त्योहार नहीं, बल्कि एक पैगन पार्टी थी। पैगन उन लोगों या परंपराओं को कहा जाता है जो ईसाई, यहूदी या इस्लाम जैसे एकेश्वरवादी धर्मों से पहले की प्राचीन प्रकृति-पूजक मान्यताओं से जुड़ी थीं। इनमें सूर्य, चंद्रमा, ऋतुओं, फसल, आग और कई देवताओं की पूजा होती थी।
इस तरह से पैगन पार्टी का अर्थ हुआ ऐसा उत्सव या जश्न जो प्राचीन, गैर-ईसाई धार्मिक परंपराओं से जुड़ा हो और जिसमें खाना-पीना, नाच-गाना, शराब, खेल और खुले तौर पर आनंद मनाया जाता हो।
प्यूरिटन्स का तर्क था कि बाइबल में कहीं भी 25 दिसंबर को यीशु के जन्म का जिक्र नहीं मिलता। उनके मुताबिक, क्रिसमस असल में रोमन साम्राज्य के पुराने पैगन उत्सवों जैसे सैटर्नेलिया की नकल था, जिसे बाद में ईसाई रंग दे दिया गया (Christmas ban history)।
उनकी सबसे बड़ी समस्या यह थी कि क्रिसमस के नाम पर शराब पी जाती थी, जुआ खेला जाता था, नाच-गाना होता था और सड़कों पर बेहूदगी फैलती थी। प्यूरिटन्स को लगता था कि यह सब एक पवित्र ईसाई जीवन के लिए सीधा खतरा है।
इसी सोच के चलते 1640 के दशक में, जब इंग्लैंड की संसद प्यूरिटन प्रभाव में आ चुकी थी, क्रिसमस पर शिकंजा कसना शुरू हुआ। 1644 में संसद ने 25 दिसंबर को जश्न का दिन मानने से इनकार करते हुए उसे फास्टिंग और ह्यूमिलिएशन का दिन घोषित कर दिया। यानी अब यह दिन खाने-पीने और खुशी का नहीं, बल्कि उपवास, प्रार्थना और पश्चाताप का होना चाहिए था (Christmas ban history)।
1645 तक चर्चों में क्रिसमस से जुड़ी विशेष प्रार्थनाएं भी बंद कर दी गईं और 1647 आते-आते हालात यहां तक पहुंच गए कि घरों में भी क्रिसमस मनाना गैरकानूनी बना दिया गया (Christmas ban history)।
क्रिसमस बैन (Christmas ban history) के खिलाफ लोगों का गुस्सा
कागजों में बैन भले सख्त था, लेकिन जमीन पर हालात अलग थे। दुकानों को जबरन खुला रखने के आदेश दिए गए, जुर्माने लगाए गए, लेकिन लोगों ने कहां हार मानी। लंदन में चोरी-छिपे क्रिसमस पार्टियां होती रहीं, कई जगह दंगे भड़क उठे। उस दौर में कोई मजबूत पुलिस व्यवस्था नहीं थी, इसलिए यह बैन काफी हद तक प्रतीकात्मक ही रह गया।
फिर आया 1660 का साल, जिसे इंग्लैंड के इतिहास में रेस्टोरेशन के नाम से जाना जाता है। क्रॉमवेल की मौत हो चुकी थी और राजा चार्ल्स द्वितीय की वापसी के साथ ही राजशाही फिर से स्थापित हो गई। सत्ता बदली और माहौल भी। प्यूरिटन्स का प्रभाव खत्म हुआ और क्रिसमस ने जैसे किसी सुपरहीरो की तरह शानदार वापसी की। जो त्योहार कभी अपराध (Christmas ban history) था, वह फिर से खुलेआम मनाया जाने लगा और लोग सचमुच झूम उठे।
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अमेरिका में प्यूरिटन्स का दबदबा
अब कहानी का दूसरा हिस्सा अमेरिका में चलता है। इंग्लैंड से भागकर जो प्यूरिटन्स 1620 के आसपास मैसाचुसेट्स बे कॉलोनी में बसे, वे अपनी सख्त सोच भी साथ लाए थे। उन्हें यह भी पसंद नहीं था कि क्रिसमस के नाम पर लोग घर-घर जाकर खाने-पीने की मांग करते थे और मना करने पर हंगामा करते थे। प्यूरिटन्स का मानना था कि जब हर दिन ईश्वर के लिए पवित्र है, तो किसी एक दिन को खास छुट्टी क्यों दी जाए (Christmas ban history)?
इसी सोच के तहत 1659 में मैसाचुसेट्स की जनरल कोर्ट ने कानून बना दिया कि जो भी क्रिसमस मनाएगा, उस पर 5 शिलिंग का जुर्माना लगेगा। काम बंद करना, दावतें देना, सार्वजनिक जश्न – सब गैरकानूनी करार दिए गए (Christmas ban history)।
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बोस्टन में 25 दिसंबर को दुकानें और स्कूल खुले रहते थे, लेकिन चर्च बंद। हालांकि यहां भी कहानी वही रही – कानून सख्त था, लेकिन लोग घरों में चुपचाप क्रिसमस मनाते रहे। प्रशासन का फोकस असल में बड़े उपद्रव रोकने पर था, इसलिए बड़े पैमाने पर सजा के मामले बहुत कम मिले।
हालात कितने तनावपूर्ण थे, इसका अंदाजा इस बात से लगता है कि 1686 में जब गवर्नर एंड्रॉस ने क्रिसमस सर्विस में हिस्सा लिया, तो विरोध की आशंका के चलते उन्हें सैनिकों की सुरक्षा लेनी पड़ी।
आखिरकार 1681 में इंग्लैंड से दबाव बढ़ा। कॉलोनी का चार्टर रद्द करने की धमकी दी गई और प्यूरिटन्स को अपने सख्त कानूनों को वापस लेना पड़ा। क्रिसमस पर लगा बैन (Christmas ban history) भी कागजों से हट गया। लेकिन समाज में इसे पूरी तरह स्वीकार किए जाने में काफी वक्त लगा।
असली बदलाव 19वीं सदी में आया, जब क्रिसमस को परिवार, दया और इंसानियत से जोड़कर देखा जाने लगा। 1856 में मैसाचुसेट्स ने इसे सार्वजनिक अवकाश बनाया और 1870 में पूरे अमेरिका में क्रिसमस आधिकारिक फेडरल हॉलिडे बन गया।



