
आज पौष माह के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि है। मंगलवार का दिन होने के कारण आज का प्रभाव मंगल ग्रह से जुड़ा हुआ माना जा रहा है, वहीं द्वादशी तिथि पर शुक्र ग्रह का आधिपत्य होता है। धार्मिक दृष्टि से यह दिन दान, सेवा और संयम के लिए विशेष फलदायी माना जाता है। आज सफला एकादशी का पारण भी किया जाएगा और इसी दिन धनु संक्रांति के साथ खरमास (Dhanu Sankranti kharmas) की शुरुआत हो रही है।
धनु संक्रांति से सूर्य देव धनु राशि में प्रवेश करते हैं। इसके साथ ही खरमास (Kharmas) आरंभ हो जाता है, जिसके चलते विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण जैसे सभी मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है। इस अवधि में पूजा-पाठ, दान और साधना को विशेष महत्व दिया जाता है।
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आज का पंचांग (Aaj Ka Panchang 16 December 2025)
विक्रम संवत 2082
मास: पौष
पक्ष: कृष्ण
तिथि: द्वादशी (रात्रि 11:57 बजे तक, इसके बाद त्रयोदशी)
वार: मंगलवार
योग: अतिगंड (दोपहर 01:23 बजे तक)
नक्षत्र: स्वाति (दोपहर 02:09 बजे तक)
करण: कौलव (प्रातः 10:38 बजे तक), तैतिल (रात्रि 11:57 बजे तक)
चंद्र राशि: तुला
सूर्य राशि: धनु (Dhanu Sankranti kharmas)
सूर्य और चंद्र का समय
सूर्योदय: सुबह 07:06 बजे
सूर्यास्त: शाम 05:27 बजे
चंद्रोदय: 17 दिसंबर को तड़के 04:41 बजे
चंद्रास्त: दोपहर 02:36 बजे
आज के शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:56 बजे से दोपहर 12:37 बजे तक
धनु संक्रांति पुण्य काल: सुबह 07:09 बजे से दोपहर 12:23 बजे तक
महा पुण्य काल: सुबह 07:09 बजे से 08:53 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:07 बजे से 02:49 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 05:34 बजे से 06:01 बजे तक
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आज के अशुभ समय
राहुकाल: दोपहर 02:52 बजे से 04:09 बजे तक
यमगण्ड: सुबह 09:42 बजे से 10:59 बजे तक
गुलिक काल: दोपहर 12:17 बजे से 01:34 बजे तक
इन समयावधियों में शुभ और नए कार्यों की शुरुआत से बचने की सलाह दी जाती है (Dhanu Sankranti kharmas)।
स्वाति नक्षत्र का प्रभाव
आज चंद्रमा तुला राशि में स्थित होकर स्वाति नक्षत्र में गोचर कर रहे हैं। स्वाति नक्षत्र के स्वामी राहु देव और देवता पवन देव माने जाते हैं। यह नक्षत्र स्वतंत्रता, लचीलापन और नए अनुभवों की ओर बढ़ने का संकेत देता है। अस्थायी प्रकृति के कार्य, यात्रा, मित्रों से मुलाकात और सामाजिक गतिविधियों के लिए यह नक्षत्र अनुकूल माना जाता है।
आज के लिए अनुकूल कार्य
आज के दिन यात्रा करना, वाहन या आवश्यक वस्तुओं की खरीदारी, मित्रों से मिलना, बागवानी, सजावटी कार्य और सामाजिक कार्यक्रमों में भाग लेना शुभ माना जाता है। अस्थायी योजनाओं की शुरुआत भी आज की जा सकती है। (Dhanu Sankranti kharmas)
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आज क्या न करें
धनु संक्रांति से शुरू हुए खरमास (Dhanu Sankranti kharmas) के कारण विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण और अन्य मांगलिक संस्कार वर्जित माने जाते हैं। इस दौरान शुभ कार्यों की जगह साधना, जप, दान और सेवा पर ध्यान देना अधिक फलदायी होता है।
धनु संक्रांति का धार्मिक महत्व
सनातन धर्म में संक्रांति का विशेष महत्व है। यह पर्व सूर्य देव को समर्पित होता है, जिन्हें आत्मा का कारक माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, धनु संक्रांति के दिन सूर्य देव की पूजा और अर्घ्य देने से सुख-समृद्धि बढ़ती है और करियर व कारोबार से जुड़ी परेशानियां दूर होती हैं। इस दिन गंगा स्नान, दान और सूर्य उपासना का विशेष फल प्राप्त होता है।
धनु संक्रांति के साथ शुरू हुआ खरमास (Dhanu Sankranti kharmas) आत्मचिंतन और संयम का समय माना जाता है। यह अवधि व्यक्ति को बाहरी आडंबर से दूर रखकर भीतर की यात्रा की ओर प्रेरित करती है।
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