
Dharm Kartikeya Ka Vrat : हिंदू धर्म में भगवान कार्तिकेय, जिन्हें स्कंद, मुरुगन और कुमारस्वामी के नाम से भी जाना जाता है, वीरता, साहस और विजय के देवता माने जाते हैं। उन्हीं को समर्पित पावन पर्व अधिक स्कंद षष्ठी (Adhik Skanda Sashti) इस वर्ष भक्तों के लिए विशेष महत्व लेकर आ रहा है।
मान्यता है कि इस दिन भगवान कार्तिकेय की पूजा और व्रत करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं, शत्रुओं पर विजय मिलती है और संतान सुख की प्राप्ति होती है।
दक्षिण भारत में यह पर्व विशेष श्रद्धा के साथ मनाया जाता है, लेकिन अब उत्तर भारत में भी स्कंद षष्ठी व्रत को लेकर लोगों की आस्था लगातार बढ़ रही है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, भगवान कार्तिकेय ने इसी दिन दैत्य तारकासुर का वध किया था, इसलिए यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है (Dharm Kartikeya Ka Vrat)।
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कब है अधिक स्कंद षष्ठी?
पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में अधिक स्कंद षष्ठी का व्रत ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को रखा जाएगा।
- षष्ठी तिथि प्रारंभ : 21 मई 2026, सुबह 8 बजकर 26 मिनट
- षष्ठी तिथि समाप्त : 22 मई 2026, सुबह 6 बजकर 24 मिनट
उदया तिथि और धार्मिक मान्यताओं के आधार पर अधिक स्कंद षष्ठी व्रत 21 मई 2026, गुरुवार को रखा जाएगा (Dharm Kartikeya Ka Vrat)।
स्कंद षष्ठी का धार्मिक महत्व
भगवान शिव और माता पार्वती के ज्येष्ठ पुत्र भगवान कार्तिकेय (Dharm Kartikeya Ka Vrat) को युद्ध और विजय का देवता कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि जो भक्त इस दिन सच्चे मन से व्रत और पूजा करते हैं, उनके जीवन से भय, रोग और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं।
यह व्रत विशेष रूप से संतान प्राप्ति, बच्चों की रक्षा और उनके अच्छे स्वास्थ्य के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। कई लोग अपने परिवार की सुख-समृद्धि और करियर में सफलता के लिए भी यह व्रत रखते हैं।
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दक्षिण भारत में भगवान मुरुगन के मंदिरों में इस दिन भव्य पूजा (Dharm Kartikeya Ka Vrat) और विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं। भक्त उपवास रखकर पूरे दिन भगवान कार्तिकेय के मंत्रों का जाप करते हैं।
अधिक स्कंद षष्ठी पूजा विधि
अधिक स्कंद षष्ठी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ या नए वस्त्र धारण करें। इसके बाद हाथ में जल और अक्षत लेकर व्रत का संकल्प लें।
घर के पूजा स्थल पर भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान कार्तिकेय की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें (Dharm Kartikeya Ka Vrat)। भगवान को गंगाजल, दूध और दही से स्नान कराएं। इसके बाद चंदन, कुमकुम और अक्षत का तिलक लगाएं।
पूजा में लाल फूल, फल, मिठाई और कलावा अर्पित करें। फिर श्रद्धा के साथ भगवान कार्तिकेय के मंत्रों का जाप करें।
पूजा के दौरान इन मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है-
‘ॐ स्कन्दाय नमः’
‘ॐ कार्तिकेयाय नमः’ (Dharm Kartikeya Ka Vrat)
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स्कंद षष्ठी व्रत के लाभ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अधिक स्कंद षष्ठी का व्रत रखने और भगवान कार्तिकेय की पूजा (Dharm Kartikeya Ka Vrat) से व्यक्ति को कई शुभ फल प्राप्त होते हैं। कहा जाता है कि इससे शत्रुओं पर विजय मिलती है, मानसिक तनाव कम होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
यह व्रत विशेष रूप से उन दंपतियों के लिए शुभ माना जाता है जो संतान सुख की कामना करते हैं। साथ ही विद्यार्थियों और नौकरी-पेशा लोगों के लिए भी यह व्रत सफलता और आत्मबल बढ़ाने वाला माना गया है।
शाम की पूजा का महत्व
स्कंद षष्ठी के दिन शाम के समय सूर्य देव और चंद्रमा को अर्घ्य देना भी शुभ माना जाता है। इसके बाद कपूर और घी के दीपक से भगवान कार्तिकेय की आरती की जाती है। मान्यता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
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