
Gambhir Nitish Reddy Affair Harming Team India : भारत ने वेस्टइंडीज के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज 2-1 से अपने नाम कर ली। पहले दो मुकाबलों में टीम इंडिया ने बड़े लक्ष्यों का जिस अंदाज में पीछा किया, उससे उसकी बल्लेबाजी की गहराई और ताकत साफ दिखाई दी। हालांकि, तीसरे वनडे में 351 रन बनाने के बावजूद पांच विकेट से मिली हार ने गेंदबाजी और फील्डिंग से जुड़े कई सवाल खड़े कर दिए। वेस्टइंडीज ने 48.2 ओवर में 352 रन बनाकर वनडे क्रिकेट में अपना सबसे बड़ा सफल रन चेज किया।
मैच के बाद कप्तान शुभमन गिल ने भी टीम की दो बड़ी कमियों की ओर इशारा किया। उन्होंने करीब छह-सात कैच छूटने और डेथ ओवरों में गेंदबाजी की रणनीति स्पष्ट नहीं होने की बात कही। पूरी सीरीज को देखें तो भारत की बल्लेबाजी सबसे मजबूत पक्ष रही, जबकि गेंदबाजी और फील्डिंग ने निराश किया। लेकिन सवाल सिर्फ तीसरे वनडे की हार का नहीं है। विश्व कप को ध्यान में रखते हुए टीम मैनेजमेंट को अब यह देखना होगा कि क्या मौजूदा गेंदबाजी संयोजन बड़े टूर्नामेंट के दबाव में भरोसे के लायक है (Gambhir Nitish Reddy Affair Harming Team India)?
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गेंदबाजी सबसे कमजोर कड़ी
सीरीज के तीनों मैचों में वेस्टइंडीज ने बड़े स्कोर बनाए। पहले मैच में उसने 295/7, दूसरे में 405/7 और तीसरे में 352/5 का स्कोर खड़ा किया। पहले दो मैच भारत ने अपनी शानदार बल्लेबाजी के दम पर जीत लिए, लेकिन तीसरे मुकाबले में 351 रन भी पर्याप्त नहीं रहे। इससे साफ है कि पावरप्ले से लेकर डेथ ओवरों तक भारतीय गेंदबाज विपक्षी बल्लेबाजों पर लगातार दबाव नहीं बना सके (Gambhir Nitish Reddy Affair Harming Team India)।
तीसरे वनडे में सबसे बड़ा सवाल डेथ बॉलिंग को लेकर रहा। भारत के पास 351 रन का मजबूत स्कोर था, लेकिन वेस्टइंडीज ने इसे 48.2 ओवर में हासिल कर लिया। खुद गिल ने माना कि डेथ ओवरों में टीम की रणनीति को लेकर स्पष्टता की कमी थी। विश्व कप से पहले यह ऐसी कमजोरी है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
नीतीश कुमार रेड्डी पर जरूरत से ज्यादा भरोसा?
यहीं से कोच गौतम गंभीर की टीम चयन नीति पर भी सवाल उठते हैं। गंभीर नीतीश कुमार रेड्डी को भविष्य में हार्दिक पंड्या के विकल्प के तौर पर तैयार करना चाहते हैं। यह सोच गलत नहीं है, लेकिन सवाल यह है कि क्या नीतीश अभी उस भूमिका के लिए पूरी तरह तैयार हैं (Gambhir Nitish Reddy Affair Harming Team India)?
गंभीर खुद ऑलराउंडर के लिए 10 ओवर की गेंदबाजी फिटनेस को महत्वपूर्ण मान चुके हैं। इसके बावजूद नीतीश अभी नियमित रूप से 10 ओवर गेंदबाजी करने की स्थिति में नहीं दिखते। तीसरे वनडे में भी उन्होंने पूरी गेंदबाजी नहीं की। बल्लेबाजी में भी उन्हें काफी नीचे भेजा गया और वह प्रभाव नहीं छोड़ सके, जिसकी टीम उनसे उम्मीद कर रही थी।
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हार्दिक पंड्या जब गेंदबाजी करते हैं तो हर ओवर में विकेट निकालने की क्षमता दिखाई देती है। नीतीश के मामले में अभी वह भरोसा नहीं बन पाया है। यही बात प्रसिद्ध कृष्णा और बरार जैसे विकल्पों पर भी लागू होती है। इन खिलाड़ियों में क्षमता जरूर है, लेकिन क्या वे अभी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सबसे बड़े दबाव के लिए तैयार हैं, यह बड़ा सवाल है (Gambhir Nitish Reddy Affair Harming Team India)।
विश्व कप को ध्यान में रखकर चयन की जरूरत
विश्व कप में अभी करीब एक साल का समय है। इसलिए युवा खिलाड़ियों को तैयार करने के साथ-साथ टीम मैनेजमेंट को यह भी देखना होगा कि बड़े टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा भरोसा किन खिलाड़ियों पर किया जा सकता है। प्रयोग जरूरी हैं, लेकिन प्रयोग की भी एक सीमा होती है। खासकर तब, जब टीम के पास अनुभवी विकल्प मौजूद हों (Gambhir Nitish Reddy Affair Harming Team India)।
मोहम्मद शमी अगर पूरी तरह फिट हैं, तो उन्हें टीम में जगह मिलने पर विचार होना चाहिए। वह प्रसिद्ध कृष्णा या किसी दूसरे विकल्प की जगह डेथ ओवरों में अनुभव और भरोसा दे सकते हैं। भुवनेश्वर कुमार जैसे गेंदबाजों पर भी टीम मैनेजमेंट परिस्थितियों और उनकी मौजूदा फिटनेस के आधार पर विचार कर सकता है। इसका मतलब यह नहीं कि पुराने खिलाड़ियों को हर हाल में वापस लाया जाए, बल्कि विश्व कप के लक्ष्य को ध्यान में रखकर सबसे उपयोगी संयोजन तैयार किया जाए।
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गंभीर को शायद इस सोच से बाहर निकलना होगा कि टीम को भविष्य के लिए तैयार करने के नाम पर अनुभवी खिलाड़ियों को जल्दी हटाना जरूरी है। पहला लक्ष्य विश्व कप जीतना होना चाहिए और इसके लिए जो खिलाड़ी सबसे ज्यादा उपयोगी साबित हो सकते हैं, उन्हें प्राथमिकता मिलनी चाहिए (Gambhir Nitish Reddy Affair Harming Team India)।
विराट-रोहित का हर रन जवाब
यह बात इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि गंभीर और मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर की जोड़ी की टीम चयन नीति पर पहले भी सवाल उठ चुके हैं। रोहित शर्मा और विराट कोहली को लेकर जिस तरह का शोर रहा, उससे यह धारणा बनी कि टीम मैनेजमेंट दोनों दिग्गजों के आगे बढ़ने के विकल्प तलाश रहा था। लेकिन अब दोनों जिस अंदाज में वनडे क्रिकेट खेल रहे हैं, वह अपने आप में इसका जवाब है।
इस सीरीज में भी रोहित और विराट ने दिखाया कि अनुभव को सिर्फ उम्र के आधार पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। विराट ने पहले वनडे में 88 गेंदों पर 139 रन बनाए। रोहित ने दूसरे मैच में 75 गेंदों पर 101 और तीसरे में 85 गेंदों पर 92 रन बनाए। पूरी सीरीज में रोहित के नाम 225 और विराट के खाते में 168 रन रहे। दोनों की निरंतरता भारत की बल्लेबाजी की सबसे बड़ी ताकतों में रही (Gambhir Nitish Reddy Affair Harming Team India)।
गिल ने कप्तानी के साथ बल्ले से भी किया प्रभावित
शुभमन गिल इस सीरीज में भारत के सबसे सफल बल्लेबाज रहे। उन्होंने तीन मैचों में 334 रन बनाए और उनका औसत 167 रहा। पहले वनडे में उन्होंने 110 रन बनाए, जबकि दूसरे मैच में 223 रन की ऐतिहासिक पारी खेली। उनका स्ट्राइक रेट 135.22 रहा। कप्तानी की जिम्मेदारी के बीच इस तरह का प्रदर्शन भारत के लिए बड़ा सकारात्मक संकेत है।
केएल राहुल ने भी मध्यक्रम में अपनी उपयोगिता साबित की। तीसरे वनडे में उन्होंने 87 गेंदों पर नाबाद 129 रन बनाए, जिसमें 10 चौके और छह छक्के शामिल थे। बड़े लक्ष्य के दबाव में तेजी से रन बनाने और पारी को अंत तक ले जाने की उनकी क्षमता भारत के लिए अहम है (Gambhir Nitish Reddy Affair Harming Team India)।
ऋतुराज गायकवाड़ ने भी तीसरे वनडे में मिले मौके का फायदा उठाया। उन्होंने रोहित के साथ 137 रन की साझेदारी की और 69 गेंदों पर 57 रन बनाए। इससे यह संकेत मिलता है कि भारत के पास बल्लेबाजी में विकल्पों की कमी नहीं है।
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कुलदीप अकेले पड़ते दिखे
गेंदबाजी में कुलदीप यादव भारत के सबसे प्रभावी गेंदबाज रहे। उन्होंने तीन मैचों में सात विकेट लिए। पहले वनडे में 40 रन देकर चार विकेट लेने के बाद उन्होंने दूसरे मुकाबले में अपने 200 वनडे विकेट पूरे किए। बीच के ओवरों में जब वेस्टइंडीज के बल्लेबाज तेजी से रन बना रहे थे, तब कुलदीप ने विकेट निकालकर भारत को राहत दी (Gambhir Nitish Reddy Affair Harming Team India)।
समस्या यह रही कि उन्हें दूसरे छोर से वैसा सहयोग नहीं मिला। सपाट पिचों पर गेंदबाजों के लिए विकेट निकालना आसान नहीं होता, लेकिन ऐसे में लाइन-लेंथ, फील्ड प्लेसमेंट और डेथ ओवरों की योजना और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। भारत को इसी हिस्से में सबसे ज्यादा काम करने की जरूरत है।
फील्डिंग ने भी बढ़ाई चिंता
तीसरे वनडे में भारतीय फील्डिंग भी चिंता का विषय रही। गिल के मुताबिक टीम ने करीब छह-सात कैच छोड़े। इतने मौके गंवाने के बाद 352 रन जैसे बड़े लक्ष्य का बचाव करना और मुश्किल हो जाता है। वेस्टइंडीज के कप्तान शाई होप ने इसका पूरा फायदा उठाया और 162 रन की नाबाद पारी खेलकर अपनी टीम को ऐतिहासिक जीत दिलाई (Gambhir Nitish Reddy Affair Harming Team India)।
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ऑस्ट्रेलिया टेस्ट सीरीज से लेकर अब तक गंभीर की कुछ रणनीतियों और टीम संयोजन पर लगातार बहस होती रही है। उनकी आक्रामक और नए खिलाड़ियों को मौका देने वाली सोच का उद्देश्य भविष्य की टीम तैयार करना हो सकता है, लेकिन अभी तक वह सोच हर मोर्चे पर अपेक्षित नतीजे नहीं दे पाई है।
राहुल द्रविड़ के कार्यकाल के अंत में टीम काफी हद तक सेटल नजर आती थी। गंभीर के सामने चुनौती अब उस टीम को अपनी सोच के मुताबिक बदलने की नहीं, बल्कि उसे और मजबूत करके विश्व कप के लिए तैयार करने की है (Gambhir Nitish Reddy Affair Harming Team India)।



