
नीलावंती (Neelavanti Granth) भारतीय साहित्य और तांत्रिक परंपरा का एक अत्यंत रहस्यमयी और विवादास्पद ग्रंथ है। यह प्राचीन संस्कृत भाषा में लिखा गया एक पाठ है, जो तांत्रिक विद्या, मंत्रों, अनुष्ठानों और ब्रह्मांड के गूढ़ रहस्यों से जुड़ा हुआ माना जाता है।
इस ग्रंथ (Neelavanti Granth) को एक यक्षिणी (एक अलौकिक स्त्री शक्ति) द्वारा लिखा गया बताया जाता है, और इसके इर्द-गिर्द बुनी गई कथाएं इसे एक ‘श्रापित’ किताब का रूप देती हैं। लोकप्रिय किवदंतियों के अनुसार, इस ग्रंथ को पढ़ने की कोशिश करने वाले कई लोगों की असामयिक मौत हो गई या उन लोगों ने अपना मानसिक संतुलन खो दिया।
कहा जाता है कि इसी कारण सरकार ने नीलावंती ग्रंथ (Neelavanti Granth) को प्रतिबंधित कर दिया। हालांकि, यह मिथक कितना सत्य है, इस पर बहस जारी है।
कहां से आया Neelavanti Granth?
इस बारे में कोई निश्चित ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है, लेकिन लोककथाओं और तांत्रिक परंपराओं के अनुसार, यह ग्रंथ एक यक्षिणी नीलावंती द्वारा लिखा गया था। यक्षिणी एक प्रकार की अलौकिक शक्ति होती है, जो तंत्र-मंत्र की दुनिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
कथा के अनुसार, नीलावंती को किसी श्राप के कारण मानव रूप में फंस जाना पड़ा, और इस ग्रंथ (Neelavanti Granth) को लिखकर उसने अपने ज्ञान को संरक्षित किया। लेकिन लिखने के बाद, उसने ही इस ग्रंथ पर श्राप दे दिया कि जो कोई भी लालच या बुरी नीयत से इसे पढ़ेगा, उसकी मृत्यु हो जाएगी। वहीं, यदि कोई व्यक्ति इसे अधूरा पढ़ ले, तो वह पागल हो जाएगा।
कुछ स्रोतों में इसे एक हिंदू साधु द्वारा लिखित बताया गया है, जो जंगलों में तपस्या के दौरान अलौकिक शक्तियों से प्रेरित हुआ। यह ग्रंथ (Neelavanti Granth) मुख्य रूप से महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में प्रचलित है, जहां तांत्रिक साधनाओं की परंपरा मजबूत है।
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क्या लिखा है इस ग्रंथ में (Neelavanti Granth)?
यह ग्रंथ तांत्रिक ज्ञान का भंडार है। इसमें विभिन्न मंत्र, यंत्र, अनुष्ठान और ब्रह्मांडीय रहस्यों का वर्णन है। मुख्य रूप से, यह ग्रंथ निम्नलिखित विषयों पर केंद्रित है :
- पशु-पक्षियों की भाषा समझना, ग्रंथ पढ़ने वाले को सभी जीव-जंतुओं की बोली समझने की शक्ति प्राप्त हो सकती है।
- गड़े हुए खजानों का पता लगाने के लिए विशेष मंत्र और विधियां।
- तंत्र-मंत्र के माध्यम से सिद्धियां प्राप्त करना, जैसे अदृश्य होना या दूरदर्शन।
- ब्रह्मांड की ऊर्जा, यक्षिणी-यक्ष साधनाएं और कर्मकांड।
यह ग्रंथ संस्कृत में होने के कारण सामान्य पाठकों के लिए जटिल है, और इसे केवल योग्य तांत्रिक गुरु के मार्गदर्शन में पढ़ने की सलाह दी जाती है।
कुछ मानते हैं कि इस ग्रंथ (Neelavanti Granth) में अलौकिक शक्तियों को साधने के गुप्त मंत्र लिखे गए हैं। कुछ का कहना है कि यह ग्रंथ समाधि और मृत्यु के अनुभवों का रहस्य खोलता है।
एक धारणा यह भी है कि इसमें जीवित अवस्था में मृत्यु का अनुभव (जीवंत समाधि) प्राप्त करने की प्रक्रिया बताई गई है।
यानी यह कोई साधारण धार्मिक पुस्तक नहीं, बल्कि एक गूढ़ और प्रयोगात्मक ग्रंथ था, जिसे समझने के लिए साधक को विशेष साधना और दीक्षा की आवश्यकता होती।
नीलावंती ग्रंथ (Neelavanti Granth) को रहस्यपूर्ण मानने के कई कारण हैं और इसमें सबसे अहम है इसका गायब हो जाना। कहा जाता है कि मूल ग्रंथ उपलब्ध ही नहीं है। केवल उसके संदर्भ और कथाएं बची हैं।
आज इसकी हिंदी अनुवादित या काल्पनिक कहानियां ऑनलाइन उपलब्ध हैं, लेकिन मूल संस्कृत पाठ दुर्लभ है। कुछ राइटर्स ने काल्पनिक किताबें लिख दी हैं, जिनमें नीलावंती नाम का इस्तेमाल किया गया है।
इसी तरह कई वेबसाइट पर ऑनलाइन लिंक दिया गया है कि यहां से ग्रंथ को डाउनलोड किया जा सकता है। हालांकि इनकी प्रामाणिकता संदिग्ध है।
इन किस्सों ने नीलावंती ग्रंथ (Neelavanti Granth) को बनाया रहस्यपूर्ण
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युवक को ज्ञान की जगह मिला पागलपन
भीमराव नाम के एक युवक को एक बार एक रहस्यमयी मठ का पता चला। उसे किताबों और पांडुलिपियों का शौक था, तो वह उस मठ में चला गया। जब उसने कोने की एक टूटी अलमारी खोली तो एक मोटा-सा ग्रंथ हाथ लगा। उसके पन्ने नीले और काले रंग की स्याही से लिखे हुए थे। भीमराव को तुरंत समझ आया कि यही नीलावंती (Neelavanti Granth) है।
उसने दीपक जलाया और पढ़ना शुरू किया। पहले पन्नों पर अजीब-से मंत्र लिखे थे, ऐसे अक्षर जिन्हें वह पूरी तरह समझ नहीं पा रहा था, लेकिन पढ़ता चला गया।
रात आधी होते-होते उसकी आंखें लाल हो गईं, चेहरे पर अजीब मुस्कान फैल गई। वह अचानक खुद से बातें करने लगा। अगले दिन गांव वालों ने देखा कि भीमराव मठ के बाहर दीवार से टकराकर हंस रहा है। धीरे-धीरे उसका दिमाग पूरी तरह खराब हो गया। तब से कहा जाने लगा कि नीलावंती पढ़ने वाला पागल हो जाता है।
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समाधि का रहस्य
एक और कथा में एक साधु का जिक्र मिलता है। वह वर्षों से तपस्या कर रहा था और उसने सुना कि नीलावंती ग्रंथ (Neelavanti Granth) में मृत्यु को जीतने का रहस्य लिखा है। उसने महीनों तक प्रार्थना की और आखिरकार किसी से वह ग्रंथ उसे मिला।
साधु ने रात भर उसका अध्ययन किया। अगले दिन लोग उसकी कुटिया में गए, तो उसने दरवाजा बंद कर रखा था। बहुत खटखटाने के बाद जब दरवाजा तोड़ा गया, तो साधु शांत मुद्रा में बैठा था – आंखें बंद, सांसें थमी हुईं। कोई घबराहट नहीं, कोई संघर्ष नहीं। वह ऐसे गया था जैसे गहरी नींद में हो। लोग कहते हैं कि ग्रंथ ने उसे मृत्यु के पार पहुंचा दिया।
योगी की भूल
कहा जाता है कि एक योगी ने नीलावंती (Neelavanti Granth) का प्रयोग करके अपने शरीर को इतना हल्का कर लिया कि वह हवा में उड़ने लगा। गांव वालों ने उसे आसमान में तैरते देखा। लोग दंग रह गए।
लेकिन योगी का मन चंचल हो गया। उसने अपनी शक्ति का प्रदर्शन करना चाहा। उसी क्षण उसका शरीर भारी हो गया और वह जोर से जमीन पर गिरा। कुछ दिनों बाद उसकी मृत्यु हो गई। तब से यह धारणा और मजबूत हो गई कि नीलावंती का ज्ञान सिर्फ गुप्त साधना के लिए है, दिखावे के लिए नहीं।
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छिपा हुआ खजाना
आज भी लोग कहते हैं कि हिमालय की गुफाओं में कुछ साधु इस ग्रंथ (Neelavanti Granth) को छिपाकर रखते हैं। वे इसे कभी किसी आम आदमी के सामने नहीं लाते। उनका विश्वास है कि इसमें ऐसे मंत्र हैं जो मनुष्य को ब्रह्मांडीय ऊर्जाओं तक पहुंचा सकते हैं। लेकिन अगर कोई साधारण व्यक्ति इन्हें पढ़ ले, तो उसकी देह और मन इस शक्ति को सह नहीं पाएंगे और उसका नाश हो जाएगा।
क्या यह सब सच है?
विद्वानों का कहना है कि हो सकता है नीलावंती वास्तव में कोई ग्रंथ (Neelavanti Granth) न हो। शायद यह केवल एक किवदंती है, एक प्रतीक, जो यह बताती है कि बिना साधना और अनुशासन के गूढ़ ज्ञान को पाना विनाशकारी हो सकता है।
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