Kanya Pujan
नवरात्रि (Chaitra Navratri 2025) में कन्या पूजन (Kanya Pujan) केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा को आमंत्रित करने का माध्यम है। यह मां दुर्गा की भक्ति का सर्वोत्तम रूप है, जो हमारी मनोकामनाओं की पूर्ति करता है और जीवन में शांति, सौभाग्य व समृद्धि का आशीर्वाद देता है।
नवरात्रि का पावन पर्व मां दुर्गा की आराधना और शक्ति उपासना का विशेष अवसर होता है। इस दौरान भक्त 9 दिनों तक व्रत रखते हैं और मां के नौ रूपों की पूजा करते हैं। नवरात्रि के अंतिम दिन कन्या पूजन (Kanya Pujan) की परंपरा है, जिसे अत्यंत पवित्र और फलदायी माना गया है।
इस विशेष पूजा में छोटी बच्चियों को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर आदरपूर्वक भोजन कराया जाता है और उनका आशीर्वाद लिया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस विधि से घर में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
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इस वर्ष कन्या पूजन (Kanya Pujan) की तिथि कब है?
इस बार नवरात्रि 2025 के अनुसार कन्या पूजन दो दिन मनाया जा रहा है –
- 5 अप्रैल को अष्टमी (Ashtami)
- 6 अप्रैल को नवमी (Ramnavami)
कुछ श्रद्धालु अष्टमी को कन्या पूजन (Kanya Pujan) करते हैं, जबकि कुछ नवमी तिथि को। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दोनों ही दिन पूजन करने का महत्व है।
अष्टमी तिथि का प्रारंभ : 4 अप्रैल, रात 8:13 बजे
अष्टमी तिथि का समापन : 5 अप्रैल, शाम 7:27 बजे
नवमी पूजन का शुभ मुहूर्त
लाभ चौघड़िया : सुबह 7:40 से 9:14 तक
अमृत चौघड़िया : सुबह 10:49 से दोपहर 12:23 तक
कितनी कन्याओं को भोजन कराना चाहिए?
शास्त्रों के अनुसार, कन्या पूजन (Kanya Pujan) के लिए 9 कन्याओं को भोजन कराना सर्वोत्तम माना गया है, क्योंकि वे मां दुर्गा के 9 रूपों की प्रतीक होती हैं।
हालांकि, यदि 9 कन्याएं उपलब्ध न हों, तो 3, 5 या 7 कन्याओं को भी पूजित किया जा सकता है।
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एक छोटे बालक को भी कन्याओं के साथ भोजन कराना चाहिए, जिसे बटुक भैरव कहा जाता है। यह पूजा की पूर्णता का प्रतीक होता है।
कन्याओं की आयु कितनी होनी चाहिए?
2 वर्ष से लेकर 10 वर्ष तक की कन्याएं इस पूजा (Kanya Pujan) के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं। इस आयु वर्ग की बच्चियों को मासूम और शुद्ध माना जाता है, जो दुर्गा स्वरूपा के रूप में पूजनीय हैं।
ऐसी कन्याओं का पूजन करने से हर प्रकार के दोषों की शांति होती है और व्यक्ति को धन, सुख और स्वास्थ्य का वरदान मिलता है।
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कन्या पूजन (Kanya Pujan) की विधि
- कन्याओं को ससम्मान आमंत्रित करें।
- उन्हें साफ-सुथरे स्थान पर बिठाएं।
- सभी कन्याओं के पैर धोकर शुद्धिकरण करें।
- रोली और अक्षत से उनके माथे पर तिलक लगाएं।
- उन्हें मां दुर्गा का रूप मानते हुए पूजा और आरती करें।
- हलवा, पूरी, चना और नारियल का प्रसाद अर्पित करें और प्रेमपूर्वक भोजन कराएं।
- कन्याओं को भोजन के बाद दक्षिणा और उपहार दें – जैसे चूड़ी, रिबन, बिंदी, फल या चुनरी।
- अंत में, उनके पैर छूकर आशीर्वाद लें और आदरपूर्वक विदा करें।
कन्या पूजन (Kanya Pujan) का धार्मिक महत्व
कन्या पूजन केवल एक धार्मिक कर्तव्य नहीं बल्कि मां दुर्गा के प्रति हमारी श्रद्धा को व्यक्त करने का सबसे पवित्र माध्यम है।
जब हम कन्याओं की पूजा करते हैं, तो हम इस सृष्टि में नारी शक्ति की महिमा को स्वीकारते हैं। यह एक सामाजिक संदेश भी है कि नारी को सम्मान देना ही देवी की सच्ची आराधना है।
इस पूजा से मां दुर्गा अति प्रसन्न होती हैं और परिवार को सुख-शांति, संतान सुख और समृद्धि प्रदान करती हैं।
कन्या पूजन (Kanya Pujan) में बोले जाने वाले मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु कन्या रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
ॐ श्री दुं दुर्गायै नमः।
इन मंत्रों का उच्चारण करते हुए पूजा करने से देवी दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
मां अम्बे की आरती (Ambe Ji Ki Aarti)
अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली।
तेरे ही गुण गावें भारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती।
तेरे भक्त जनो पर माता भीर पड़ी है भारी,
दानव दल पर टूट पड़ो मां करके सिंह सवारी।
सौ-सौ सिहों से बलशाली, है अष्ट भुजाओं वाली,
दुष्टों को तू ही ललकारती। ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती।
माँ-बेटे का है इस जग में बड़ा ही निर्मल नाता,
पूत-कपूत सुने हैं पर ना माता सुनी कुमाता।
नहीं मांगते धन और दौलत, न चांदी न सोना,
हम तो मांगें तेरे चरणों में छोटा सा कोना।
चरण शरण में खड़े तुम्हारी, ले पूजा की थाली,
वरद हस्त सर पर रख दो माँ संकट हरने वाली।



