
Sleep
दुनिया भर में नींद (Sleep) से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। शोध बताते हैं कि लगभग 62% वयस्कों को नियमित रूप से नींद न आने की समस्या होती है, और करीब 30% लोग अनिद्रा (इनसोम्निया) से जूझते हैं। नींद की कमी सेहत पर गंभीर असर डाल सकती है, जिससे मानसिक तनाव, ध्यान की कमी और हृदय रोग जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
अगर पूरी नींद न ली जाए, तो शरीर जल्दी थकने लगता है, ऊर्जा कम होती है और सेहत पर नकारात्मक असर पड़ता है।
नींद में खलल क्यों आता है (Why is sleep disturbed)
नींद न आने की कई वजहें हो सकती हैं, जिनमें मुख्य रूप से मोबाइल, लैपटॉप, टीवी जैसी स्क्रीन का अधिक इस्तेमाल, तनाव, डिप्रेशन, शरीर में पोषक तत्वों की कमी, सही समय पर भोजन न करना, शराब या सिगरेट का अधिक सेवन, जंक फूड, खर्राटे, खराब बिस्तर और मोटे तकिए पर सोने जैसी आदतें शामिल हैं।
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इसके अलावा, स्लीप एप्नीया (सोते समय सांस लेने में रुकावट) भी एक बड़ी समस्या है, जिसे अक्सर नजरअंदाज किया जाता है।
अधूरी नींद के दुष्प्रभाव (Side effects of lack of sleep)
नींद (Sleep) की कमी का असर तुरंत दिखने लगता है। यह शरीर पर चोट लगने जैसा होता है, जिसका प्रभाव मानसिक और शारीरिक दोनों स्तरों पर पड़ता है। कम नींद से चिड़चिड़ापन, ध्यान में कमी, हॉर्मोनल असंतुलन, याद्दाश्त कमजोर होना, चिंता, महिलाओं में माहवारी की अनियमितता, शुगर और बीपी जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
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अगर ये बीमारियां पहले से हैं, तो कम नींद की वजह से उन्हें नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है। यहां तक कि रिश्तों पर भी इसका असर पड़ सकता है।
उम्र के अनुसार कितनी नींद जरूरी है (How much sleep is needed according to age)
हालांकि नींद (Sleep) की जरूरत व्यक्ति विशेष पर निर्भर करती है, लेकिन औसतन उम्र के अनुसार नींद की यह अवधि होनी चाहिए :
0 से 3 महीने : 15-19 घंटे
4 से 11 महीने : 13-17 घंटे
1 से 2 साल : 11-15 घंटे
3 से 5 साल : 10-14 घंटे
6 से 13 साल : 9-12 घंटे
14 से 17 साल : 8-11 घंटे
18 से 25 साल : 7-9 घंटे
26 से 64 साल : 6-8 घंटे
65 साल से ऊपर : 5-7 घंटे
बेहतर नींद के लिए आसान उपाय
- स्क्रीन से दूरी बनाना जरूरी (Mobile effect on sleep)
आजकल सबसे बड़ी समस्या स्क्रीन टाइम है। 20-25 साल पहले यह समस्या कम थी, लेकिन मोबाइल और इंटरनेट के सस्ते होने के बाद लोग देर रात तक इनसे जुड़े रहते हैं। इससे आंखों और दिमाग की नसों पर दबाव पड़ता है, जिससे नींद प्रभावित होती है। बेड पर जाने से कम से कम आधे घंटे पहले मोबाइल, लैपटॉप और टीवी से दूरी बनानी चाहिए। साथ ही, कमरे में रोशनी कम या बंद होनी चाहिए।
- बेड और तकिया सही होना चाहिए
अच्छी नींद के लिए बिस्तर और तकिए की गुणवत्ता भी मायने रखती है। अगर गद्दा बहुत सख्त या बहुत नरम हो, तो यह नींद में बाधा डाल सकता है। नए बेड पर सोने से कई बार नींद में खलल पड़ता है। इसी तरह, ज्यादा ऊंचे तकिए का इस्तेमाल करने से गर्दन की मांसपेशियाँ असंतुलित हो जाती हैं और खर्राटे आने लगते हैं। तकिए की ऊँचाई 3 से 4 इंच तक ही होनी चाहिए।
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- स्पाइनल बाथ से मिल सकती है राहत
अगर नींद (Sleep) न आने की समस्या हो रही हो, तो स्पाइनल बाथ एक अच्छा उपाय हो सकता है। इसमें गुनगुने पानी से भरे टब में जांघ से लेकर गर्दन तक 10-15 मिनट तक बैठा जाता है। इससे स्पाइनल कॉर्ड और नर्व सेल्स को आराम मिलता है, जिससे दिमाग को शांति मिलती है और अच्छी नींद आती है।
अरोमा थेरेपी और मसाज के फायदे
लैवेंडर तेल की खुशबू नींद को बेहतर बनाने में मदद करती है। सोने (Sleep) से पहले तकिए पर लैवेंडर तेल की 2-3 बूंदें डालने से अच्छी नींद आती है। अगर सिरदर्द या तनाव हो, तो नारियल या बादाम तेल में लैवेंडर तेल मिलाकर सिर की मालिश करने से भी राहत मिलती है। इससे मांसपेशियों को आराम मिलता है और नींद बेहतर होती है।
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मालिश का असर
शारीरिक थकान से नींद अच्छी आती है, लेकिन ज्यादा थकान होने पर मांसपेशियों में दर्द हो सकता है, जिससे नींद में खलल पड़ता है। ऐसे में पैरों की मालिश करना फायदेमंद हो सकता है। गुनगुने सरसों के तेल से 2-3 मिनट तक पैरों की मसाज करने से नसों को आराम मिलता है और नींद जल्दी आती है।
नींद का सही तरीका और आदतें
गलत पोजीशन में सोने (Sleep) से भी नींद प्रभावित हो सकती है। पैर चढ़ाकर या हाथ को सिर के नीचे दबाकर सोने से शरीर पर दबाव पड़ता है, जिससे नींद में बाधा आ सकती है। इसके अलावा, खर्राटों की समस्या भी बढ़ रही है, जो आगे चलकर स्लीप एप्नीया में बदल सकती है। यह समस्या शुगर और बीपी जैसी बीमारियों से भी जुड़ी होती है, इसलिए इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
रात में देर से सोने के नुकसान
जल्दी सोने (Sleep) और जल्दी उठने से सेहत को कई फायदे मिलते हैं। अगर किसी का काम देर रात तक करने का है, तो सुबह जल्दी उठकर दोबारा सोने की आदत डालनी चाहिए। सुबह की ताजी हवा और सूरज की पहली किरण सेहत के लिए फायदेमंद होती है।
पावर नैप (Power Nap)
अगर रात की नींद पूरी नहीं हुई हो, तो दिन में 10-20 मिनट की पावर नैप लेना फायदेमंद हो सकता है। लेकिन इसे ज्यादा लंबा नहीं करना चाहिए, वरना यह पूरी नींद में बदल सकता है।
https://en.wikipedia.org/wiki/Insomnia



