

टेक दिग्गज गूगल (Google) ने अपने सॉफ्टवेयर इंजीनियरों के लिए कड़े नए नियम लागू कर दिए हैं। कंपनी ने साफ कर दिया है कि अब सभी इंजीनियर coding tasks के लिए सिर्फ गूगल के internal AI models का ही इस्तेमाल करेंगे। अगर कोई इंजीनियर किसी बाहरी third-party AI tool का इस्तेमाल करना चाहता है, तो उसे पहले कंपनी से मंजूरी लेनी होगी।
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब गूगल (Google) के CEO सुंदर पिचाई (Sundar Pichai) ने जुलाई की ऑल-हैंड्स मीटिंग में साफ कहा कि गूगल को आगे बढ़ाना है तो हर कर्मचारी को AI adoption करना ही होगा। अब मैनेजर्स भी कर्मचारियों से पूछ रहे हैं कि वे रोजाना अपने काम में AI का कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। माना जा रहा है कि आने वाली performance reviews में यह अहम भूमिका निभाएगा।
Google की वाइस प्रेसिडेंट ऑफ इंजीनियरिंग, मेगन कचोलिया (Megan Kacholia) ने भी जून में इंजीनियर्स को ईमेल भेजकर साफ किया था कि अब कोडिंग प्रोडक्टिविटी बढ़ाने के लिए AI टूल्स का इस्तेमाल जरूरी है।
यह भी पढ़ें : Mind Reading Technology : अब कंप्यूटर पढ़ सकेगा हमारे मन की आवाज
कोडिंग में 30% तक AI-जनरेटेड कोड
Google ने खुद खुलासा किया है कि अब कंपनी में लिखे जाने वाले कोड (AI Generated Code) का 30% से ज्यादा हिस्सा AI तैयार कर रहा है। पिछले साल अक्टूबर में यह आंकड़ा 25% था। यानी AI टूल्स के कारण प्रोडक्टिविटी में तेजी से इजाफा हुआ है।
इंजीनियरों की नई जॉब प्रोफाइल्स में भी यह साफ लिखा गया है कि उन्हें समस्या-समाधान (Problem Solving) के लिए AI का इस्तेमाल करना होगा।
Google के इंटरनल टूल्स और नई तकनीक
Google ने Cider नाम का एक डेवलपमेंट प्लेटफॉर्म तैयार किया है, जिसमें Gemini for Google (पहले Goose) जैसे मॉडल शामिल हैं। यह खास तौर पर Google के इंटरनल टेक्निकल डेटा पर ट्रेन किया गया है।
सिर्फ इंजीनियरिंग ही नहीं, बल्कि सेल्स और लीगल टीम को भी AI टूल्स जैसे NotebookLM और Gemini AI (Google Gemini AI) अपनाने की ट्रेनिंग दी जा रही है। कई कर्मचारियों को अपनी टीम के हिसाब से कस्टम AI वर्जन बनाने की जिम्मेदारी दी गई है।
यह भी पढ़ें : AI : क्या मशीनें भी पछता सकती हैं?
Windsurf डील से बड़ा संदेश
Google ने हाल ही में 2.4 अरब डॉलर खर्च कर AI स्टार्टअप Windsurf का अधिग्रहण किया है। इसके साथ ही कंपनी के सीईओ वरुण मोहन (Varun Mohan) और उनकी टीम को भी Google से जोड़ा गया है। यह कदम बताता है कि कंपनी (Google) ‘Agentic Coding’ की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
हालांकि, कंपनी के भीतर सब खुश नहीं हैं। कुछ कर्मचारी Google के मैसेज बोर्ड पर मीम्स पोस्ट कर रहे हैं, जिनमें सवाल उठाया जा रहा है कि अगर तकनीक इतनी प्रभावी है तो क्या इसे अनिवार्य बनाने की जरूरत पड़नी चाहिए?
Duga Radar : जब रूसी टक-टक ने पूरी दुनिया के सिर में दर्द कर दिया था



