Pahalgam attack
पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले (Pahalgam attack) में 28 निर्दोष पर्यटकों की हत्या ने एक बार फिर आतंकवाद की जड़ पर उंगली उठाई है – और वह जड़ है पाकिस्तान (Pakistan)। लेकिन इस बार पाकिस्तान सिर्फ इनकार नहीं कर रहा, वह डरा हुआ है। डर इस बात का कि कहीं भारत फिर से बालाकोट जैसी कार्रवाई न कर दे, जैसा उसने पुलवामा हमले के बाद किया था।
‘हमें इससे कोई वास्ता नहीं…’ – पाकिस्तान की घबराहट का सबूत
हमले (Pahalgam attack) के अगले ही दिन पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ (Khawaja Asif) और विदेश मंत्रालय ने बड़ी सफाई से कहा, ‘हमारा इससे कोई लेना-देना नहीं।’ लेकिन सवाल यह है कि अगर वास्ता नहीं है, तो इतनी जल्दी बयान क्यों देना पड़ा? इसका सीधा जवाब है – भारत की प्रतिक्रिया का डर।
2016 के Uri attack और फिर 2019 के Pulwama attack के बाद भारत की रणनीति साफ रही है – जहां से हमला होगा, जवाब वहीं मिलेगा। और इसी नीति का नमूना दुनिया ने बालाकोट में देखा, जब भारतीय वायुसेना ने पाक अधिकृत क्षेत्र में आतंकियों के ठिकाने तबाह कर दिए थे।
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TRF है लश्कर का नया नकाब
हमलावरों में दो विदेशी आतंकवादी भी शामिल थे। यह आतंकवादी सैन्य वेशभूषा में आए थे और उन्होंने निर्दोष लोगों पर अंधाधुंध गोलीबारी की। पहलगाम हमले (Pahalgam attack) की जिम्मेदारी The Resistance Front (TRF) ने ली है, जो कि लश्कर-ए-तैयबा (Lashkar-e-Taiba – LeT) का ही नया और छद्म चेहरा है। इस तरह के नामों के पीछे छुपकर पाकिस्तान दुनिया की आंखों में धूल झोंकना चाहता है। लेकिन भारत अब इस खेल को बहुत अच्छे से समझ चुका है।
पाकिस्तानी सेना प्रमुख का उकसावा
पाकिस्तान (Pakistan) के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने हमले से कुछ दिन पहले ही कश्मीर को ‘पाकिस्तान की शिरा (jugular vein)’ बताया था। उन्होंने इस्लामाबाद में हुए प्रवासी सम्मेलन में कहा था, ‘हम कश्मीर को नहीं भूलेंगे। यह हमारी नसों में है।’
भारत ने इसका मुंहतोड़ जवाब दिया। विदेश मंत्रालय ने कहा था, ‘भारत के संघ शासित प्रदेश में विदेशी का क्या काम? पाकिस्तान को केवल अवैध कब्जा किए गए क्षेत्रों को खाली करना है, वही उसका एकमात्र रिश्ता है कश्मीर से।’
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Pahalgam attack को लेकर पीएम मोदी की आपात बैठक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरते ही राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, विदेश मंत्री और विदेश सचिव से आपात बैठक की। यह संकेत है कि भारत अब कूटनीतिक नहीं, सैन्य और रणनीतिक विकल्पों पर भी विचार कर रहा है।
मोदी की चेतावनी,
प्रधानमंत्री ने X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा,
मैं जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा करता हूं। जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके प्रति मेरी संवेदनाएं हैं। मैं प्रार्थना करता हूं कि जो लोग घायल हुए हैं, वे जल्द से जल्द ठीक हों। प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता प्रदान की जा रही है।
जो भी इस नृशंस कृत्य के पीछे हैं, उन्हें न्याय के कठघरे में लाया जाएगा… उन्हें बख्शा नहीं जाएगा! उनका यह दुष्ट इरादा कभी सफल नहीं होगा। आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई अडिग है, और यह और भी मजबूत होगी।
कुल मिलाकर, पाकिस्तान का इनकार (Pakistan denial) इस बार सिर्फ एक राजनयिक बयान नहीं है, यह उस डर का प्रतिबिंब है जो उसे भारत के जवाब से है।
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बालाकोट ने पाकिस्तान को दिखा दिया था कि भारत अब धैर्य नहीं, प्रतिशोध की भाषा समझता है। पहलगाम आतंकी हमला (Pahalgam terror attack) एक चेतावनी है, और पाकिस्तान जानता है कि जवाबी कार्रवाई अगर हुई, तो वह कूटनीतिक नहीं होगी – वह सर्जिकल और निर्णायक होगी।
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