
US Venezuela Crisis : दक्षिण अमेरिका का देश वेनेजुएला एक बार फिर वैश्विक राजनीति के केंद्र में आ गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी सेना ने एक बड़े सैन्य ऑपरेशन में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को पकड़ लिया है और उन्हें देश से बाहर ले जाया गया है।
ट्रंप ने न्यूयॉर्क टाइम्स से बातचीत में इस ऑपरेशन को बेहद शानदार बताया और कहा कि इसमें अमेरिकी सेना की एलिट यूनिट्स शामिल थीं। इस दावे के बाद कराकस और आसपास के इलाकों में विस्फोटों की खबरें सामने आईं और पूरे लैटिन अमेरिका में हड़कंप मच गया (US Venezuela Crisis)।
कराकस में धमाके, वेनेजुएला सरकार ने बताया सैन्य हमला
शनिवार तड़के वेनेजुएला की राजधानी कराकस में जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं। सरकार ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने नागरिक और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए बड़ा हमला किया है।
वेनेजुएला की उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने सरकारी टीवी पर कहा कि मादुरो और उनकी पत्नी को लेकर उन्हें कोई जानकारी नहीं है और उन्होंने अमेरिका से प्रूफ ऑफ लाइफ की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी हमले में निर्दोष नागरिक मारे गए हैं (US Venezuela Crisis)।
वहीं रक्षा मंत्री व्लादिमीर पाद्रीनो लोपेज ने इसे अपराधी और बर्बर आक्रमण करार देते हुए जनता और सेना से एकजुट होकर विरोध करने की अपील की।
अमेरिका ने क्यों किया हमला?
डोनाल्ड ट्रंप और निकोलस मादुरो के बीच टकराव नया नहीं है। ट्रंप के कार्यकाल के दौरान अमेरिका ने मादुरो सरकार को अवैध बताते हुए विपक्षी नेता जुआन गुएदो को वेनेजुएला का अंतरिम राष्ट्रपति मान्यता दी थी।
अमेरिका का आरोप है कि मादुरो चुनावों में धांधली करते हैं, विपक्ष को कुचलते हैं, देश को तानाशाही की ओर ले गए हैं और ड्रग ट्रैफिकिंग व भ्रष्टाचार को संरक्षण देते हैं(US Venezuela Crisis)।
ट्रंप प्रशासन ने मादुरो पर नार्को-स्टेट चलाने का आरोप लगाया था और उनके खिलाफ इनाम तक घोषित किया गया था। इसके अलावा वेनेजुएला का विशाल तेल भंडार भी अमेरिका-वेनेजुएला टकराव की बड़ी वजह माना जाता है।
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वेनेजुएला की राजनीतिक व्यवस्था
वेनेजुएला आधिकारिक रूप से एक गणराज्य है, लेकिन पिछले दो दशकों से यहां सत्ता पर चाविस्मो आंदोलन का कब्जा है। इसकी शुरुआत ह्यूगो चावेज से हुई थी, जो 1999 में सत्ता में आए।
चावेज और बाद में मादुरो ने सत्ता का केंद्रीकरण किया, न्यायपालिका और चुनावी संस्थाओं पर नियंत्रण बढ़ाया और विपक्ष को कमजोर किया।
आज वेनेजुएला में राष्ट्रपति के पास बेहद ताकतवर अधिकार हैं, जबकि संसद और संस्थाएं कमजोर मानी जाती हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि देश में नाम मात्र का लोकतंत्र बचा है।
अमेरिका-वेनेजुएला संबंधों का इतिहास
अमेरिका और वेनेजुएला के रिश्ते कभी दोस्ताना थे, खासकर जब वेनेजुएला अमेरिका को तेल सप्लाई करता था। लेकिन 1999 के बाद हालात बदले (US Venezuela Crisis)।
ह्यूगो चावेज ने अमेरिका विरोधी नीति अपनाई और रूस, चीन और क्यूबा से नजदीकी बढ़ाई। उन्होंने तेल उद्योग का राष्ट्रीयकरण किया। वहां पर अमेरिकी तेल कंपनियों ने ही उद्योग विकसित किया था। राष्ट्रीयकरण होने से कंपनियों की संपत्ति सरकार के पास चली गई। ट्रंप की नाराजगी की वजह यह भी है।
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इसके जवाब में अमेरिका ने आर्थिक प्रतिबंध लगाए, तेल व्यापार पर रोक लगाई और विदेशी संपत्तियां जब्त कीं। ट्रंप के दौर में यह टकराव चरम पर पहुंच गया और अब यह सीधे सैन्य संघर्ष की ओर बढ़ता दिख रहा है (US Venezuela Crisis)।
UN Security Council की मांग
कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने सोशल मीडिया पर लिखा कि कराकस पर बमबारी हो रही है और उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने की मांग की।
क्यूबा के राष्ट्रपति मिगेल डियाज-कनेल ने अमेरिका के हमले को राज्य प्रायोजित आतंकवाद करार दिया और कहा कि यह पूरे लैटिन अमेरिका पर हमला है।
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका का लक्ष्य मादुरो सरकार को गिराना, वेनेजुएला की तेल संपदा पर नियंत्रण और चीन-रूस के प्रभाव को कम करना है। पिछले कुछ महीनों में अमेरिका ने वेनेजुएला के आसपास सैन्य जमावड़ा बढ़ाया था, तेल टैंकर जब्त किए थे और समुद्री नाकेबंदी जैसी कार्रवाइयां की थीं (US Venezuela Crisis)।
अगर ट्रंप का दावा सही साबित होता है, तो यह लैटिन अमेरिका के इतिहास का सबसे बड़ा सैन्य हस्तक्षेप माना जाएगा। लेकिन अगर यह दावा विवादित या अधूरा निकला, तो अमेरिका को अंतरराष्ट्रीय कानून उल्लंघन के गंभीर आरोपों का सामना करना पड़ सकता है (US Venezuela Crisis)।
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