

भारत और इंग्लैंड के बीच द ओवल (The Oval) में चल रहे पांचवें टेस्ट मैच में वॉशिंगटन सुंदर (Washington Sundar) की 39 गेंदों पर बनी शानदार फिफ्टी ने भारत को दूसरी पारी में 396 के स्कोर तक पहुंचाया।
यशस्वी जायसवाल (Yashasvi Jaiswal) के शतक (118), आकाशदीप (Akash Deep) के 66 और रवींद्र जडेजा (Ravindra Jadeja) के 53 रनों के साथ मिलकर सुंदर की तेजतर्रार पारी ने भारत को इंग्लैंड के सामने 374 रनों का बड़ा लक्ष्य खड़ा करने में मदद की। अब सारा दारोमदार मोहम्मद सिराज (Mohammed Siraj) की अगुवाई वाले भारतीय पेस अटैक पर है, जो यह मैच जीतकर सीरीज़ ड्रॉ कर सकती है और एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी (Anderson-Tendulkar Trophy) अपने पास बनाए रख सकती है।
लेकिन इस क्रिकेटिंग हाइप के बीच एक कहानी ऐसी भी है, जो सिर्फ रन या विकेट के बारे में नहीं है। और वह कहानी वॉशिंगटन सुंदर (Washington Sundar) नाम के पीछे छिपी है।
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भारतीय क्रिकेटर वॉशिंगटन सुंदर (Washington Sundar) का नाम सुनते ही बहुत से लोग हैरान हो जाते हैं। एक हिंदू परिवार में ‘वॉशिंगटन’ जैसा नाम असामान्य लगता है। लेकिन इसके पीछे की जो वजह है, वह आपको भावुक कर देगी।
वॉशिंगटन सुंदर के पिता, एम. सुंदर (M. Sundar) भी एक क्रिकेटर बनना चाहते थे। उन्होंने तमिलनाडु (Tamil Nadu Cricket) के लिए क्रिकेट खेला, लेकिन राज्य की मुख्य टीम तक नहीं पहुंच पाए। उनका क्रिकेटिंग सफर कठिन था, क्योंकि वह एक बेहद साधारण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आते थे।
तभी उनके जीवन में एक व्यक्ति आए – पी.डी. वॉशिंगटन (P.D. Washington)। वह एक रिटायर्ड आर्मी ऑफिसर थे, जो अपने इलाके के बच्चों को खेलते देखना पसंद करते थे। उन्होंने एम. सुंदर के खेल को पहचाना और उन्हें पूरा सपोर्ट देना शुरू किया। उन्होंने एम. सुंदर को पढ़ाई में मदद की, क्रिकेट किट दी और यहां तक कि स्कूल तक साइकिल से छोड़ने और लाने का ज़िम्मा भी लिया।
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पिता ने रखा बेटे का नाम वॉशिंगटन (Washington Sundar)
वर्ष 1999 में पी.डी. वॉशिंगटन का निधन हो गया। उसी साल एम. सुंदर के घर एक बेटे ने जन्म लिया। पहले तो उन्होंने बेटे का नाम ‘श्रीनिवासन’ रखने का सोचा, लेकिन कुछ ही मिनटों में उन्हें यह अहसास हुआ कि इस बच्चे का नाम किसी ऐसे शख्स पर होना चाहिए, जिसने उनके जीवन को बदल दिया था।
और इस तरह, उन्होंने अपने बेटे का नाम रखा – वॉशिंगटन सुंदर (Washington Sundar)।
यह नाम सिर्फ एक पहचान नहीं है, बल्कि एक श्रद्धांजलि है उस व्यक्ति को, जिसने बिना किसी स्वार्थ के एक युवा को आगे बढ़ाया।
बेन स्टोक्स को जवाब
इंग्लैंड के खिलाफ चौथे टेस्ट (India vs England Test) की चौथी पारी में वॉशिंगटन सुंदर (Washington Sundar) ने सेंचुरी लगाई थी। उनके शतक की बदौलत टीम इंडिया वह टेस्ट मैच ड्रॉ करा सकी थी।
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खेल का आखिरी घंटा शुरू होने पर काफी ड्रामा भी हुआ था। इंग्लैंड के कप्तान बेन स्टोक्स (Ben Stokes) चाहते थे कि मैच खत्म कर दिया जाए क्योंकि परिणाम निकलने की कोई उम्मीद नहीं थी, लेकिन वॉशिंगटन सुंदर (Washington Sundar) और जडेजा सेंचुरी के करीब थे, इसलिए पारी जारी रही।
बेन स्टोक्स तब इससे नाराज हो गए थे। बाद में क्रिकेट दिग्गजों ने स्टोक्स के इस बर्ताव के लिए उन्हें खूब लताड़ा भी। पांचवें टेस्ट में धुआंधार पारी खेलकर वॉशिंगटन सुंदर (Washington Sundar) ने पूरी इंग्लिश टीम के साथ बेन स्टोक्स को भी जवाब दिया है, जो इस मैच में चोट की वजह से नहीं खेल रहे।
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