
दिल्ली-एनसीआर में आवारा कुत्तों (Stray Dogs) को लेकर सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश ने देशभर में एक नई बहस छेड़ दी है। कोर्ट ने साफ कहा है कि सभी इलाकों को स्ट्रे डॉग्स (Stray Dogs) से मुक्त किया जाए और किसी भी पकड़े गए कुत्ते को वापस सड़क पर नहीं छोड़ा जाए। इस आदेश के बाद न सिर्फ आम लोग, बल्कि राजनीतिक नेताओं और पशु अधिकार कार्यकर्ताओं में भी हलचल मच गई है।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश और विवाद की शुरुआत
सोमवार को जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने आदेश दिया कि दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा, गाजियाबाद, एमसीडी और एनएमडीसी तुरंत आवारा कुत्तों को पकड़ने की कार्रवाई शुरू करें, खासकर उन इलाकों में जो अधिक संवेदनशील हैं। कोर्ट ने यहां तक कहा कि यदि कोई व्यक्ति या संस्था इस प्रक्रिया में बाधा डालेगी तो उसके खिलाफ कंटेम्प्ट (Contempt) की कार्रवाई होगी।
यह आदेश आते ही सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक विरोध शुरू हो गया। इंडिया गेट पर कई पशु प्रेमी, कार्यकर्ता और डॉग केयरगिवर्स ने प्रदर्शन किया, जिन्हें बाद में पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
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राहुल गांधी और मेनका गांधी का विरोध
कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने इस आदेश को दशकों पुरानी मानवीय और विज्ञान-आधारित नीति से पीछे हटने वाला कदम बताया। उन्होंने कहा कि ये बेजुबान हमारी समस्याएं नहीं हैं जिन्हें मिटा दिया जाए। राहुल गांधी का सुझाव है कि आश्रय स्थल, नसबंदी, टीकाकरण और कम्युनिटी केयर के जरिए सड़कों को सुरक्षित रखा जा सकता है, बिना किसी क्रूरता के।
भाजपा सांसद और पशु अधिकार कार्यकर्ता मेनका गांधी (Maneka Gandhi stray dog remark) ने भी इस फैसले को गुस्से में दिया गया अजीब आदेश बताया। उनका कहना है कि दिल्ली में कोई भी सरकारी डॉग शेल्टर नहीं है और तीन लाख से ज्यादा आवारा कुत्तों को रखने के लिए जगह और संसाधन जुटाना असंभव है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस कदम से हर गली में टकराव होगा, भारी आर्थिक बोझ पड़ेगा और अन्य राज्यों से भी कुत्ते (Stray Dogs) दिल्ली में आकर संख्या दोगुनी कर देंगे।
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भारत में आवारा कुत्तों (Stray Dogs) की संख्या और खतरे
भारत में आवारा कुत्तों (Stray Dogs) की समस्या गंभीर है। NDDB और 2023 के सरकारी अनुमान के मुताबिक देश में करीब 1.53 करोड़ स्ट्रे डॉग्स हैं। इनमें से बड़ी संख्या शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों में रहती है।
- उत्तर प्रदेश – लगभग 20 लाख
- महाराष्ट्र – 16 लाख
- बिहार – 12 लाख
- मध्य प्रदेश – 11 लाख
- राजस्थान – 9 लाख
- दिल्ली-एनसीआर – करीब 3 लाख
इनकी वजह से हर साल लाखों लोग डॉग बाइट (Dog Bite) का शिकार होते हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2023 में देशभर में 17 लाख से अधिक डॉग बाइट केस दर्ज हुए।
- उत्तर प्रदेश – 2.8 लाख केस
- महाराष्ट्र – 2.4 लाख केस
- बिहार – 1.6 लाख केस
- दिल्ली-एनसीआर – 85 हज़ार केस
डॉग बाइट से रेबीज (Rabies) का खतरा भी बढ़ता है, जो अब भी भारत में हर साल हजारों मौतों का कारण है। ग्रामीण इलाकों से लेकर महानगरों तक, ये कुत्ते खुले में घूमते हैं। कई बार ये इंसानों को काटने और सड़क हादसों का कारण भी बनते हैं, वहीं दूसरी ओर ये लाखों पशु प्रेमियों के लिए देखभाल और दया के प्रतीक हैं।
आवारा पशुओं (Stray Dogs) की समस्या सिर्फ कुत्तों तक सीमित नहीं है। कई राज्यों में सड़कों पर गाय, सांड, बकरी और सूअर भी घूमते मिलते हैं, जिससे ट्रैफिक जाम, सड़क हादसे और सफाई की समस्या बढ़ती है।
क्या है कानून?
भारत में Prevention of Cruelty to Animals Act, 1960 और Animal Birth Control (Dog) Rules, 2001 जैसे कानून मौजूद हैं। इन नियमों के तहत आवारा कुत्तों (Stray Dogs) को मारना प्रतिबंधित है और उनकी नसबंदी व टीकाकरण के बाद उन्हें उसी क्षेत्र में छोड़ा जाना चाहिए। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश ने इस पॉलिसी को चुनौती देते हुए कुत्तों को स्थायी रूप से शेल्टर में रखने का निर्देश दिया है।



