
Anurag Kashyap
फिल्म निर्माता और अभिनेता अनुराग कश्यप (Anurag Kashyap) एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह है उनके द्वारा ब्राह्मण समुदाय पर की गई एक विवादास्पद टिप्पणी, जिसने सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हलचल मचा दी। विवाद की जड़ है उनकी बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘Phule’, जो समाज सुधारकों ज्योतिबा और सावित्रीबाई फुले के जीवन पर आधारित है।
इस फिल्म की रिलीज पहले 11 अप्रैल को तय थी, लेकिन Censor Board of Film Certification (CBFC) द्वारा सुझाए गए बदलावों और ब्राह्मण संगठनों की आपत्तियों के कारण इसे दो हफ्ते के लिए टाल दिया गया। नई रिलीज डेट अब 25 अप्रैल तय की गई है।
विवाद कैसे भड़का
फिल्म ‘Phule’ की रिलीज़ में देरी को लेकर नाराज अनुराग कश्यप (Anurag Kashyap) ने एक सोशल मीडिया पोस्ट डाली, जिस पर एक यूजर ने कमेंट किया,
‘Brahmins tumhare baap hain. Jitna tumhari unse sulgegi, utna tumhari sulgaayenge.’
इस पर अनुराग कश्यप (Anurag Kashyap) ने जवाब दिया –
‘Brahmin pe main mootoonga.. koi problem?’
यह टिप्पणी तुरंत वायरल हो गई और भारी विरोध शुरू हो गया। तजिंदर बग्गा (Tajinder Bagga), सतीश चंद्र दुबे जैसे नेताओं ने इस पर सख्त आपत्ति जताई और #ArrestAnuragKashyap जैसे हैशटैग्स ट्रेंड करने लगे।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और कानूनी मांगें
BJP नेता तजिंदर बग्गा (Tajinder Bagga) ने ट्विटर पर लिखा,
‘मैं @MumbaiPolice से अनुरोध करता हूं कि अनुराग कश्यप (Anurag Kashyap) के खिलाफ FIR दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए। ऐसे मानसिक रूप से अस्थिर लोग समाज के लिए खतरा हैं।’
वहीं केंद्रीय मंत्री सतीश चंद्र दुबे (Satish Chandra Dubey) ने कहा, ‘यह नीच आदमी समझता है कि पूरी ब्राह्मण जाति पर थूक कर बच जाएगा? अगर इसने तुरंत सार्वजनिक माफी नहीं मांगी, तो चैन से नहीं जी पाएगा।’
अनुराग कश्यप की माफी (Anurag Kashyap’s Apology)
लगातार मिल रही death threats और rape threats के बाद Anurag Kashyap ने शुक्रवार रात इंस्टाग्राम पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए माफी मांगी। उन्होंने लिखा,
‘This is my apology, not for my post, but for that one line taken out of context and the brewing hatred. No action or speech is worth your daughter, family, friends and colleagues getting rape and death threats from the kingpins of sanskar.’
उन्होंने आगे कहा, ‘So kahi hui baat wapis nahin li ja sakti aur na loonga. Lekin mujhe jo gaali deni है, दीजिए। मेरे परिवार ने कुछ नहीं कहा। Brahmin log, auraton ko baksh do – itna sanskar to shastron mein bhi hai, sirf Manusmriti mein nahi. Aap kaun se Brahmin hain, ये आप तय करें। मेरी तरफ से माफी।’
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‘Phule’ फिल्म पर विवाद (Phule Film Controversy)
‘Phule’ फिल्म में प्रतीक गांधी और पत्रलेखा मुख्य भूमिका में हैं, और यह 19वीं सदी के दो क्रांतिकारी समाज सुधारकों की कहानी कहती है जिन्होंने जातिवाद और लिंगभेद के खिलाफ आवाज उठाई। फिल्म का विषय संवेदनशील होने के कारण अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज (Akhil Bhartiya Brahmin Samaj) और परशुराम आर्थिक विकास महामंडल (Parshuram Aarthik Vikas Mahamandal) जैसे संगठनों ने आपत्ति जताई कि फिल्म में ब्राह्मण समुदाय को गलत रूप में दिखाया गया है।
इस पर CBFC ने कुछ सुझाव दिए, जिन्हें फिल्म निर्माताओं ने स्वीकार किया और रिलीज डेट को दो हफ्ते आगे बढ़ा दिया ताकि समुदायों के साथ संवाद किया जा सके और विवाद शांत हो।
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यह विवाद केवल एक फिल्म या एक टिप्पणी से कहीं ज्यादा गहरा है। यह बताता है कि भारत में freedom of speech, caste identity, और social media responsibility जैसे मुद्दे किस तरह एक-दूसरे से टकराते हैं।



