

हाल ही में एक छोटा उल्कापिंड पृथ्वी के बेहद करीब से गुजरा (Asteroid passes close to Earth), लेकिन अंतरिक्ष एजेंसियों को इसके बारे में घंटों बाद पता चला। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) ने बताया कि यह उल्कापिंड, जिसका नाम 2025 TF है, 1 से 3 मीटर चौड़ा था और यह पृथ्वी से केवल 265 मील यानी लगभग 426 किलोमीटर की ऊंचाई पर अंटार्कटिका के ऊपर से गुजरा। यह ऊंचाई अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) जितनी ही थी। आइए, इस घटना के बारे में विस्तार से जानते हैं।
ESA ने बताया कि इसे देखना बहुत चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि इतनी छोटी वस्तु को अंधेरे अंतरिक्ष में ट्रैक करना आसान नहीं है।
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NASA के अनुसार, ESA के वैज्ञानिकों ने इसे तब देखा जब यह एस्टेरॉयड पहले ही पास से गुजर चुका था। (Asteroid passes close to Earth)
सौभाग्य से, यह एस्टेरॉयड पृथ्वी के लिए कोई बड़ा खतरा नहीं था। लेकिन अगर यह वायुमंडल में घुसता, तो मिनी फायरबॉल बन सकता था और छोटे टुकड़े गिर सकते थे। फिर भी, इसका आकार इतना छोटा था कि यह ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा सकता था।
स्पेस सैटेलाइट्स आम तौर पर 100 से 1,000 मील की ऊंचाई पर रहते हैं। इस हिसाब से यह एस्टेरॉयड भी सैटेलाइट्स के बीच से गुजर रहा था (Asteroid passes close to Earth)।
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं (Asteroid passes close to Earth)
2023 में भी एक उल्कापिंड पृथ्वी के बेहद करीब से गुजरा था, जिसे अब तक का सबसे करीबी उल्कापिंड माना गया। इसके अलावा, इस साल की शुरुआत में नासा ने बताया था कि एक बड़ा उल्कापिंड 2032 तक चंद्रमा से टकराने की 4% संभावना रखता है।
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भविष्य में फिर आएगा 2025 TF?
नासा के अनुसार, उल्कापिंड 2025 TF अगली बार अप्रैल 2087 में पृथ्वी के करीब आ सकता है। यानी, अगले 62 साल तक इसके दोबारा आने की संभावना नहीं है।
अंतरिक्ष एजेंसियां सतर्क
ESA और नासा जैसी अंतरिक्ष एजेंसियां लगातार अंतरिक्ष में ऐसी वस्तुओं पर नजर रखती हैं। छोटे उल्कापिंडों को ट्रैक करना मुश्किल होता है, लेकिन आधुनिक तकनीक और रडार सिस्टम की मदद से अब इनका पता लगाना संभव हो रहा है। यह घटना बताती है कि हमें अंतरिक्ष की निगरानी को और मजबूत करने की जरूरत है।
यह घटना हमें याद दिलाती है कि हमारा अंतरिक्ष कितना रहस्यमयी और अप्रत्याशित है। हालांकि, इस बार कोई खतरा नहीं था, लेकिन भविष्य में बड़े उल्कापिंडों से बचाव के लिए वैज्ञानिक लगातार काम कर रहे हैं।
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