

दिल्ली के डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक (Satyapal Malik) का आज निधन हो गया। वह 79 वर्ष के थे और लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उनके निधन की पुष्टि उनके आधिकारिक X (पूर्व में ट्विटर) हैंडल से की गई, जहां बताया गया कि उन्हें 9 जुलाई को ICU में भर्ती कराया गया था।
सार्वजनिक जीवन में पांच दशक से अधिक का योगदान
Satyapal Malik भारतीय राजनीति में एक जानी-मानी हस्ती रहे हैं, जिन्होंने 50 वर्षों से अधिक समय तक देश की राजनीति में प्रभावशाली भूमिका निभाई। वह भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) के एक मजबूत नेता रहे, और कई बार संसद सदस्य और राज्यपाल के रूप में देश की सेवा कर चुके हैं।
वह जम्मू-कश्मीर के अंतिम राज्यपाल थे, जब 5 अगस्त 2019 को वहां से अनुच्छेद 370 हटाया गया और राज्य को केंद्र शासित प्रदेश में बदला गया। इस ऐतिहासिक निर्णय के समय वह सत्ता में थे और अक्सर अपने बेबाक बयानों को लेकर चर्चा में रहते थे।
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सत्यपाल मलिक (Satyapal Malik) की टीम ने उनके स्वास्थ्य को लेकर समय-समय पर सोशल मीडिया पर अपडेट दिए, ताकि अफवाहों से बचा जा सके। जून 2025 में उन्होंने खुद बताया था कि वे करीब एक महीने से अस्पताल में भर्ती हैं और उन्हें किडनी से जुड़ी समस्याएं थीं।
किसानों की लड़ाई में अगली पंक्ति के योद्धा (Satyapal Malik farmer protest)
सत्यपाल मलिक केवल एक प्रशासक नहीं थे, बल्कि एक आंदोलनकारी और जनहित के पैरोकार भी थे। उन्होंने खुद खुलासा किया था कि वह किसान आंदोलन (Farmers’ Protest) और महिला पहलवानों के समर्थन में सबसे आगे थे। अपने जून के पोस्ट में उन्होंने लिखा था, ‘मैं किसान परिवार से हूं। न डरने वाला हूं, न झुकने वाला।’
इस मामले में उन्होंने सीधा केंद्र सरकार से टकराव ले लिया था। नवंबर 2021 में मेघालय का राज्यपाल रहते हुए उन्होंने जयपुर में जो भाषण दिया, उसने देश में काफी हलचल मचा दी थी।
कृषि कानूनों पर सत्यपाल मलिक (Satyapal Malik) ने अपने पुराने बयानों का जिक्रक करते हुए कहा था कि उन्हें दिल्ली के कुछ लोगों द्वारा राज्यपाल बनाया गया था और उन्हें इस बात की पूरी जानकारी थी कि वह किसानों के मुद्दों पर उनकी इच्छा के खिलाफ बोल रहे हैं।
जिस दिन वे मुझसे कहेंगे कि उन्हें मेरी बातों से दिक्कत है, उस दिन मैं एक मिनट भी इंतजार नहीं करूंगा। पहले ही दिन मैंने किसानों के समर्थन में बोला था और आंदोलन में शामिल होने के लिए तैयार था। – सत्यपाल मलिक (Satyapal Malik) (पुराना बयान)
किसान आंदोलन के दौरान मरने वाले किसानों पर केंद्र की चुप्पी को लेकर भी उन्होंने तीखे सवाल उठाए थे। उनका दावा था कि आंदोलन में 600 से अधिक लोग मारे गए, लेकिन शीर्ष नेताओं की ओर से एक शब्द भी शोक का नहीं आया, यह दुर्भाग्यपूर्ण है।



