वाराणसी के चौबेपुर थाना क्षेत्र के छितौना गांव में मामूली विवाद से शुरू हुआ मामला अब जातीय संघर्ष और राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। खेत में एक छुट्टा गाय घुसने से शुरू हुई कहासुनी ने देखते ही देखते ठाकुर और राजभर समुदाय के बीच हिंसक झड़प (Thakur vs Rajbhar dispute Varanasi) का रूप ले लिया, जिसमें तलवार और लाठियों का भी प्रयोग हुआ। मामला बढ़ने पर थाना प्रभारी को हटाया गया और चार IPS अधिकारियों की SIT गठित कर दी गई है।
5 जुलाई को छितौना गांव में संजय सिंह के खेत में एक छुट्टा गाय घुस गई। संजय सिंह ने गाय को भगाया, लेकिन वह पास के खेत में चली गई, जो राजभर समुदाय के छोटू, भोले, गुलाम और सुरेंद्र राजभर का था। उन्होंने गाय को फिर संजय के खेत में धकेल दिया। यही बात विवाद की जड़ बन गई और दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस के बाद मारपीट शुरू हो गई।
झड़प के दौरान राजभर पक्ष पर आरोप है कि उन्होंने संजय सिंह और अनुराग सिंह पर तलवार से हमला किया। दोनों पक्षों में जबरदस्त मारपीट हुई, जिसमें लाठी-डंडों का इस्तेमाल हुआ।
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आरोपों के मुताबिक, सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि पुलिस (Varanasi Police) की मौजूदगी में ही संजय सिंह और उनके परिजनों को पुलिस जीप से उतारकर पीटा गया। घायलों को अस्पताल ले जाते समय भी हमला जारी रहा। कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए और उन्हें वाराणसी ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया।
6 जुलाई को राजभर पक्ष की ओर से ज्वाला प्रसाद राजभर की तहरीर पर संजय सिंह, अनुराग सिंह, अमित सिंह और एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ हत्या के प्रयास समेत IPC की गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया। अनुराग और अमित को जेल भेज दिया गया।
वहीं, दूसरे पक्ष की शिकायत पर पुलिस (Varanasi Police) की ओर से कोई तत्काल कार्रवाई नहीं की गई। यह पक्षपातपूर्ण रवैया सामने आने पर करणी सेना के जिलाध्यक्ष आलोक सिंह अपने समर्थकों के साथ थाने पहुंचे और दबाव बनाते रहे कि संजय सिंह पर हमला करने वालों के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज हो।
इससे विवाद जातीय रंग (Thakur vs Rajbhar dispute) लेने लगा।
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भारी दबाव के बाद दर्ज हुआ दूसरा पक्ष का केस
लगातार विरोध और मीडिया व राजनीतिक दबाव के चलते 8 जुलाई को पुलिस ने संजय सिंह के भाई दिगपाल सिंह की शिकायत पर भोला राजभर, राम गुलाम, सुरेंद्र, राजेंद्र, रामाश्रय, महेंद्र राजभर समेत सात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया।
थाना प्रभारी लाइन हाजिर, SIT का गठन
पुलिस की निष्क्रियता और असंतुलित कार्रवाई को गंभीरता से लेते हुए पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने क्राइम मीटिंग बुलाई। चौबेपुर थाने के प्रभारी रविकांत मलिक को लापरवाही के लिए तत्काल हटा दिया गया और उन्हें लाइन हाजिर कर दिया गया। उनके स्थान पर अजीत कुमार वर्मा को चौबेपुर थाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मामले की गहन जांच के लिए चार IPS अधिकारियों की विशेष जांच टीम (SIT) गठित की गई है।
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मंत्री और नेताओं की एंट्री से मामला और गरमाया
घायलों से मिलने के लिए राज्य मंत्री अनिल राजभर ट्रॉमा सेंटर पहुंचे, जिससे मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया और यह विवाद ठाकुर बनाम राजभर (Thakur vs Rajbhar dispute Varanasi) में बदल गया।
वहीं ओपी राजभर के बेटे और नेता अरविंद राजभर (Minister Arvind Rajbhar) ने लखनऊ में DGP से मुलाकात कर निष्पक्ष जांच की मांग की। इस मुलाकात के बाद प्रशासन हरकत में आया और तेजी से फैसले लिए गए।
बताया जा रहा है कि इसके बाद ही वाराणसी पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने शुक्रवार रात में क्राइम मीटिंग बुलाई। चौबेपुर मामले में लापरवाही बरतने पर थाना प्रभारी को लाइन हाजिर कर दिया।
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इस घटना ने यूपी में जातीय राजनीति और पुलिस की निष्पक्षता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। क्या पुलिस दबाव में काम कर रही है? क्या राजनीति कानून से ऊपर हो गई है? ये सवाल अब आमजन के बीच चर्चा में हैं।
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