
Jawaharlal Nehru : 27 मई 2025 को जब देश ने भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू (Jawaharlal Nehru) की 61वीं पुण्यतिथि मनाई, तब कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने उनकी वसीयत के कुछ अंश सार्वजनिक किए। यह वसीयत उन्होंने अपनी मौत से लगभग दस साल पहले लिखी थी, जिसमें उन्होंने साफ शब्दों में अपनी आखिरी इच्छा दर्ज की थी। वह चाहते थे कि उनकी अस्थियां देश के खेतों में उड़ाकर बिखेर दी जाएं, ताकि वे भारत की मिट्टी में समा जाएं।
नेहरू ने अपनी वसीयत में लिखा था कि उनकी अस्थियों का बड़ा हिस्सा एक विमान में ऊंचाई पर ले जाकर उन खेतों में बिखेर दिया जाए, जहां भारत का किसान मेहनत करता है। वह चाहते थे कि उनकी राख देश की उस धरती का हिस्सा बन जाए, जिसके लिए उन्होंने जीवन भर संघर्ष किया।
उनकी वसीयत में एक और महत्वपूर्ण अनुरोध था – उन्होंने लिखा, ‘मेरी एक मुठ्ठी अस्थियां प्रयागराज में गंगा नदी में प्रवाहित कर दी जाएं, ताकि वह भारत के तटों को छूती हुई महासागर तक पहुंच जाएं।’
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यह उनकी भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत के प्रति गहरी श्रद्धा का प्रतीक था।
Jawaharlal Nehru एक थे, लेकिन अनेक भी
जयराम रमेश ने वसीयत साझा करते हुए लिखा, ‘नेहरू (Jawaharlal Nehru) के लिए भारत एक भी था और अनेक भी। वह विविधता में एकता के सबसे बड़े संरक्षक थे। आज जब भारत की आत्मा पर बार-बार चोट की जा रही है, तो नेहरू की विचारधारा को फिर से अपनाने की जरूरत है।’
उन्होंने आगे लिखा कि नेहरू (Jawaharlal Nehru) सिर्फ इतिहास रचने वाले नेता नहीं थे, बल्कि एक शांत, समझदार और विनम्र इंसान भी थे, जिन्हें अपनी पहचान जताने के लिए कभी झूठे दावों या अहंकार का सहारा नहीं लेना पड़ा।
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पीएम नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी ने दी श्रद्धांजलि
नेहरू की पुण्यतिथि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर उन्हें श्रद्धांजलि दी, ‘हमारे पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू (Jawaharlal Nehru) को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि।’
वहीं राहुल गांधी ने लिखा, ‘नेहरू जी ने एक मजबूत और समावेशी भारत का सपना देखा था। उन्होंने आधुनिक भारत की नींव रखी। सामाजिक न्याय, लोकतंत्र, संविधान और शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान अमूल्य है।’
नेहरू न सिर्फ भारत के पहले प्रधानमंत्री थे, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख स्तंभों में भी शामिल रहे। 1947 से 1964 तक प्रधानमंत्री रहते हुए उन्होंने भारत को गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) की दिशा में अग्रसर किया। बच्चों से उनके विशेष लगाव के कारण आज भी 14 नवंबर को ‘बाल दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।



