
Sonbhadra Mine Collapse : सोनभद्र के बिल्ली मरकुंडी खनन क्षेत्र में शनिवार दोपहर हुए भयावह माइन कोलैप्स (Mine Collapse) ने पूरे इलाके को दहला दिया। हादसे के तीन दिन बाद भी रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है और प्रशासन के लिए हर मिनट चुनौती बनता जा रहा है। सोमवार को मलबे से तीन और मजदूरों के शव मिलने के बाद मौत का आंकड़ा बढ़कर चार हो गया है।
प्रशासन को अब भी आशंका है कि कुछ मजदूर मलबे के नीचे जीवित या मृत अवस्था में फंसे हो सकते हैं। शनिवार को मजदूर नियमित ड्रिलिंग के दौरान चट्टानों में छेद कर रहे थे, तभी खदान का एक हिस्सा अचानक धंस गया और कई मजदूर भारी चट्टानों और मिट्टी के नीचे दब गए। उसी रात 28 वर्षीय राजू सिंह गोंड़ का शव निकाला गया, और सोमवार को तीन और मजदूरों के शव मिलने के बाद पूरा इलाका मातम में डूब गया।
स्थानीय लोगों का दावा है कि उस समय साइट पर करीब 18 मजदूर मौजूद थे, जबकि प्रशासन का अनुमान है कि 7–8 मजदूर मलबे में दबे हो सकते हैं। इसी अनिश्चितता ने बचाव कार्य को और गंभीर बना दिया है (Sonbhadra Mine Collapse)।
NDRF, SDRF और पुलिस की टीमें मौके पर लगातार काम कर रही हैं, रात में भी रुकावट न आए इसलिए प्रशासन ने विशेष रोशनी और मशीनों की व्यवस्था की है। जिले के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद हैं और रेस्क्यू ऑपरेशन की निगरानी कर रहे हैं।
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खदान हादसे (Sonbhadra Mine Collapse) में खनन कंपनी पर केस
हादसे (Sonbhadra Mine Collapse) के बाद प्रशासनिक कार्रवाई भी तेज हो गई है। ओबरा पुलिस ने कृष्णा माइनिंग वर्क्स और उसके दो कर्मचारियों – मधुसूदन सिंह और दिलीप केशरी के खिलाफ धारा 105 के तहत FIR दर्ज की है।
शिकायत स्थानीय निवासी छोटू यादव ने दर्ज कराई, जिनके दो भाई, इंद्रजीत यादव और संतोष यादव, अभी भी लापता हैं। उनका आरोप है कि खनन कंपनी ने सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया, जिससे इतनी बड़ी दुर्घटना हुई।
इसी बीच साइट के बाहर राजनीतिक तनाव भी देखने को मिला। समाजवादी पार्टी के सांसद छोटेलाल खरवार जब रविवार को मौके पर पहुंचे, तो पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। भीड़ बढ़ने पर पुलिस को हल्का बल प्रयोग भी करना पड़ा। सांसद ने आरोप लगाया कि इलाके में राजनीतिक संरक्षण में अवैध खनन (Illegal Mining) होता है और बिना सुरक्षा उपायों के किए जाने वाले ऐसे काम ही हादसों (Sonbhadra Mine Collapse) की वजह बनते हैं। हालांकि जिला प्रशासन का कहना है कि कंपनी के पास 2026 तक वैध माइनिंग लीज है और ब्लास्टिंग की अनुमति भी नियमित है।
जिला प्रशासन का कहना है कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हादसा ब्लास्टिंग के लिए की जा रही ड्रिलिंग के दौरान हुआ, लेकिन विस्तृत जांच से ही यह तय होगा कि चूक कहां हुई और किसकी जिम्मेदारी थी। फिलहाल पूरा प्रशासनिक तंत्र रेस्क्यू में जुटा हुआ है, और सबसे बड़ी प्राथमिकता मलबे में फंसे मजदूरों को सुरक्षित निकालने की है।
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