
वाराणसी जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एमजी मोटर इंडिया (MG Motor India) को एक बड़े मामले में राहत दी है। यह मामला मिर्जापुर के चुनार स्थित गलेन्हिल स्कूल, रामबाग द्वारा दायर किया गया था, जिसे स्कूल के सचिव आफताब अहमद ने फोरम में प्रस्तुत किया था। आयोग के अध्यक्ष सुरेंद्र कुमार सिंह और सदस्य सुमन दुबे की पीठ ने 1 जुलाई 2025 को दिए गए फैसले में परिवादी का परिवाद खारिज कर दिया।
परिवादी पक्ष के अनुसार, 22 फरवरी 2023 को उन्होंने अपने संगठन के लिए एक MG Hector Electric कार खरीदने के उद्देश्य से एमजी मोटर के शोरूम का दौरा किया। उस समय शोरूम में बताया गया कि भारत सरकार की ओर से इस इलेक्ट्रिक कार पर 5 लाख रुपये की सब्सिडी उपलब्ध है, जो कार की डिलीवरी और पूर्ण भुगतान के समय छूट के रूप में दी जाएगी। इस आधार पर परिवादी ने 1,51,000 रुपये की अग्रिम राशि शोरूम को अदा की।
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हालांकि, जब उन्होंने कार की डिलीवरी लेने के लिए संपर्क किया, तो MG Motor शोरूम के अधिकारियों ने किसी भी प्रकार की सब्सिडी देने से इनकार कर दिया। इसके बाद, परिवादी ने अपनी अग्रिम राशि वापस करने की मांग की, जिस पर शोरूम के कर्मचारियों के साथ विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई।
इस विवाद को लेकर गलेन्हिल स्कूल ने जिला उपभोक्ता आयोग (District Consumer Commission) में शिकायत दर्ज की। विपक्षी पक्ष यानी MG Motor की ओर से अधिवक्ता विवेकानंद सिंह ने पूरी तैयारी के साथ फोरम में अपना लिखित कथन, साक्ष्य और बहस प्रस्तुत की।
अधिवक्ता विवेकानंद सिंह ने 1 जुलाई 2025 को आयोग के समक्ष एक प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत करते हुए कहा कि परिवादी न तो व्यक्तिगत रूप से और न ही किसी प्रतिनिधि के माध्यम से फोरम के समक्ष उपस्थित हुआ, और न ही कोई स्थगन याचिका दाखिल की। उन्होंने यह भी कहा कि पर्याप्त अवसर देने के बावजूद परिवादी की लगातार अनुपस्थिति यह दर्शाती है कि उसे इस मामले को आगे बढ़ाने में कोई रुचि नहीं है।
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अधिवक्ता ने तर्क दिया कि परिवादी की अनुपस्थिति आयोग के नियमों का दुरुपयोग है, जिससे न केवल एमजी मोटर (MG Motor) को नुकसान हो रहा है, बल्कि मामले को अनावश्यक रूप से लंबा खींचकर समय और संसाधनों की भी बर्बादी हो रही है। उन्होंने न्याय हित में परिवाद को खारिज करने की प्रार्थना की।
दोनों पक्षों की बहस सुनने और दस्तावेज़ों की जांच के बाद आयोग ने आदेश सुरक्षित रखा और अंततः परिवादी द्वारा प्रस्तुत परिवाद को खारिज कर दिया। इस निर्णय के साथ MG Motor को कानूनी राहत मिली है और यह मामला उनके पक्ष में निपट गया।
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