
जरा सोचिए, कोई आपसे कहे कि वह मच्छरों की फैक्ट्री (Mosquito Factory) में काम करता है, तो आपके दिमाग में क्या आएगा? शायद यही कि दुनिया में पहले से ही मच्छर कम हैं क्या, जो अब इन्हें बनाने की फ़ैक्ट्री खोल दी गई? लेकिन ब्राजील के वैज्ञानिकों ने इस अजीब-सी लगने वाली सोच को ही एक हथियार बना दिया है, डेंगू और जीका (Dengue, Zika) जैसे खतरनाक वायरस से लड़ने के लिए।
दुनिया की सबसे बड़ी मच्छर फैक्ट्री (World’s Largest Mosquito Factory)
ब्राजील के शहर कुरितिबा (Curitiba, Brazil) में बनी यह दुनिया की सबसे बड़ी mosquito factory है। यहां हर हफ्ते करीब 10 करोड़ मच्छरों के अंडे तैयार होते हैं। लेकिन घबराइए मत, यह वही खतरनाक Aedes aegypti मच्छर नहीं हैं, जो डेंगू फैलाते हैं। इन खास मच्छरों में Wolbachia नाम का बैक्टीरिया डाला गया है, जो वायरस को फैलने ही नहीं देता।
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इन मच्छरों को प्यार से Wolbitos कहा जा रहा है। जब इन्हें शहरों में छोड़ा जाएगा, तो ये जंगली मच्छरों से मिलकर प्रजनन करेंगे और उनकी अगली पीढ़ी भी इसी Wolbachia को आगे बढ़ाएगी। धीरे-धीरे पूरी आबादी ही ऐसे मच्छरों से भर जाएगी, जो इंसानों को नुकसान नहीं पहुंचा पाएंगे।
पहले से साबित हो चुकी है सफलता
यह तरीका कोई प्रयोग भर नहीं है। कोलंबिया, इंडोनेशिया और ब्राजील के ही शहर नितेरोई (Niterói) में Wolbachia-carrying मच्छरों को छोड़ने के बाद डेंगू के मामले 69% तक घट गए। अब ब्राजील सरकार ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर अपनाने का फैसला किया है। ब्राजील में पिछले साल डेंगू के 65 लाख केस मिले थे, इसी वजह से इस फैक्ट्री (Mosquito Factory) की जरूरत बढ़ गई।
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फैक्ट्री (Mosquito Factory) के भीतर की रोचक कहानी
फैक्ट्री (Mosquito Factory) के अंदर का नजारा किसी साइंस-फिक्शन फिल्म से कम नहीं। यहां बड़े-बड़े जालीनुमा पिंजरों में लाखों मच्छर लगातार अंडे दे रहे हैं। छोटे-छोटे अंडों को इकट्ठा करके दवाइयों जैसी कैप्सूल में भरा जाता है। इन कैप्सूल को आसानी से किसी भी जगह भेजा जा सकता है और पानी में डालते ही इनमें से मच्छर निकल आते हैं।
लेकिन इतने मच्छरों को पालना इतना आसान नहीं है। ये बेहद नाज़ुक होते हैं, humidity और temperature थोड़ा भी गड़बड़ हुआ तो पूरा बैच खराब हो सकता है। यही वजह है कि फैक्ट्री (Mosquito Factory) को हर चरण पर मच्छरों के लिए अलग-अलग माहौल तैयार करना पड़ता है।
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खून की अजीब जरूरत
अब सवाल उठता है कि इतने मच्छर अंडे देंगे कैसे? इसके लिए चाहिए खून। जंगली मच्छरों को इंसानी खून आसानी से मिल जाता है, लेकिन फैक्ट्री के मच्छरों के लिए यह संभव नहीं। शुरुआत में ब्लड बैंक का इस्तेमाल किया गया, लेकिन फैक्ट्री को हर हफ्ते 70 लीटर खून चाहिए, जो इंसानी खून से पूरा होना असंभव था।
इसलिए वैज्ञानिकों ने एक नया रास्ता निकाला, घोड़ों का खून। पास के एक फार्म से घोड़ों का खून लिया जाता है (बिना किसी नुकसान के), और यही Wolbitos को खिलाया जाता है। धीरे-धीरे ये मच्छर इस नए डाइट के आदी हो रहे हैं।
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जनता और अफवाहों से जंग
फैक्ट्री (Mosquito Factory) की सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ मच्छर पालना नहीं, बल्कि लोगों की शंका और अफवाहें भी हैं। सोशल मीडिया पर कई बार यह अफवाह फैलाई गई कि ये मच्छर बीमारी फैला रहे हैं। यहां तक कि कुछ लोगों ने फैक्ट्री को जलाने तक की धमकी दे दी।
इसीलिए वैज्ञानिकों ने community engagement programs शुरू किए। स्थानीय लोगों को समझाने के लिए वर्कशॉप्स और बैठकों का आयोजन किया जाता है। नतीजा यह है कि अब तक 90% से ज़्यादा लोग Wolbitos का समर्थन कर रहे हैं।
27 अगस्त को Wolbitos की पहली खेप ब्राजील के सांता कातारीना (Santa Catarina) राज्य में छोड़ी गई। अब जल्द ही इन्हें राजधानी ब्राजीलिया (Brasilia) में भी छोड़ा जाएगा। अगर यह प्रयोग पूरी तरह सफल होता है, तो आने वाले समय में डेंगू जैसी बीमारियों से जंग लड़ने का तरीका पूरी दुनिया में बदल सकता है।
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