
Google Mosquito Project : आमतौर पर लोग मच्छरों से छुटकारा पाने के लिए हर संभव उपाय करते हैं। लेकिन कल्पना कीजिए कि दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में से एक खुद करोड़ों मच्छरों को खुले वातावरण में छोड़ने की तैयारी कर रही हो। सुनने में यह अजीब लग सकता है, लेकिन अमेरिका में ऐसा ही एक बड़ा वैज्ञानिक प्रयोग शुरू होने वाला है।
गूगल की पैरेंट कंपनी Alphabet ने अमेरिका के कैलिफोर्निया और फ्लोरिडा राज्यों में अगले दो वर्षों के दौरान लगभग 3.2 करोड़ विशेष रूप से तैयार किए गए मच्छर छोड़ने की अनुमति मांगी है। इस परियोजना का उद्देश्य मच्छरों की आबादी को कम करना और उनसे फैलने वाली खतरनाक बीमारियों पर नियंत्रण पाना है (Google Mosquito Project)।
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क्या है गूगल का Debug Project?
यह परियोजना Alphabet की लाइफ साइंस कंपनी Verily द्वारा चलाई जा रही है। इसे वर्ष 2016 में Debug Project के नाम से शुरू किया गया था। इस कार्यक्रम का मकसद आधुनिक तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और रोबोटिक्स की मदद से मच्छरों की आबादी को नियंत्रित करना है।
फिलहाल यह प्रस्ताव अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (EPA) के पास मंजूरी के लिए भेजा गया है। एजेंसी इसकी समीक्षा कर रही है और आम लोगों की राय भी मांगी गई है (Google Mosquito Project)।
आखिर इन मच्छरों में खास क्या है?
इस योजना का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि छोड़े जाने वाले मच्छर केवल नर होंगे। वैज्ञानिकों ने इन नर मच्छरों में Wolbachia नामक एक प्राकृतिक बैक्टीरिया डाला है। जब ये नर मच्छर जंगली मादा मच्छरों के साथ प्रजनन करते हैं, तो उनके अंडे विकसित नहीं हो पाते और उनसे नए मच्छर पैदा नहीं होते (Google Mosquito Project)।
धीरे-धीरे किसी इलाके में मच्छरों की संख्या कम होने लगती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नर मच्छर इंसानों को नहीं काटते, इसलिए लोगों को अतिरिक्त मच्छरों के काटने का खतरा नहीं होगा।
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इस परियोजना का मुख्य लक्ष्य Culex Mosquitoes हैं। यही मच्छर कई खतरनाक बीमारियों के वाहक माने जाते हैं। इनमें प्रमुख हैं – वेस्ट नाइल वायरस (West Nile Virus) और सेंट लुइस एन्सेफेलाइटिस (St. Louis Encephalitis)।
अमेरिका के रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र के अनुसार, वेस्ट नाइल वायरस देश में सबसे आम मच्छर जनित बीमारी है। कैलिफोर्निया में हाल ही में इसके नए मामलों के संकेत भी मिले हैं, जिससे स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ी हुई है (Google Mosquito Project)।
AI और रोबोटिक्स कैसे कर रहे हैं मदद?
करोड़ों मच्छरों को तैयार करना और उनमें से केवल नर मच्छरों की पहचान करना आसान काम नहीं है। यहीं पर Google की तकनीकी ताकत काम आती है।
Debug Project में AI आधारित सिस्टम का उपयोग किया जा रहा है जो मादा और नर मच्छरों को अलग-अलग पहचान सकते हैं। इसके अलावा विशेष रोबोट मच्छरों के पालन-पोषण और उनकी तैयारी का काम करते हैं (Google Mosquito Project)।
मच्छरों को विभिन्न इलाकों में छोड़ने के लिए स्वचालित वाहन और विशेष वितरण प्रणाली भी विकसित की गई है। यही तकनीक इस परियोजना को बड़े पैमाने पर लागू करने में मदद कर रही है।
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पहले भी सफल रहे हैं ऐसे प्रयोग
Wolbachia तकनीक कोई बिल्कुल नई अवधारणा नहीं है। इससे पहले फ्लोरिडा की कई स्थानीय मच्छर नियंत्रण एजेंसियां सीमित स्तर पर ऐसे प्रयोग कर चुकी हैं।
इन परीक्षणों में जंगली मच्छरों की आबादी में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई थी। Alphabet अब इसी तकनीक को कहीं अधिक बड़े स्तर पर लागू करना चाहती है (Google Mosquito Project)। यदि मंजूरी मिल जाती है तो परियोजना दो चरणों में लागू होगी।
पहले वर्ष में कैलिफोर्निया में 1.6 करोड़ मच्छर और फ्लोरिडा में 1.6 करोड़ मच्छर छोड़े जाएंगे। फिर दूसरे साल में दोनों राज्यों में 1.6-1.6 करोड़ मच्छरों का छोड़ा जाना है। इस तरह दो वर्षों में कुल 3.2 करोड़ मच्छर वातावरण में छोड़े जाएंगे।
क्या यह प्रयोग सुरक्षित है?
वैज्ञानिकों का कहना है कि क्योंकि छोड़े जाने वाले सभी मच्छर नर होंगे और नर मच्छर इंसानों को नहीं काटते, इसलिए सीधे तौर पर लोगों के लिए स्वास्थ्य जोखिम बहुत कम है। साथ ही Wolbachia एक प्राकृतिक बैक्टीरिया है जो पहले से कई कीट प्रजातियों में पाया जाता है (Google Mosquito Project)।
हालांकि पर्यावरण विशेषज्ञ इस बात पर भी नजर रखे हुए हैं कि इतनी बड़ी संख्या में किसी प्रजाति की आबादी कम करने का स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र पर क्या प्रभाव पड़ सकता है। यही कारण है कि अंतिम अनुमति देने से पहले EPA विस्तृत समीक्षा कर रही है।
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