
देश की आजादी की लड़ाई में अपने साहस और समर्पण से एक अलग पहचान बनाने वाले बाल सेनानी और ‘नगर सेठ’ के नाम से विख्यात लालमन सोनकर (Lalman Sonkar) का 12 मई को निधन हो गया। काशी (Kashi) के मंडुवाडीह स्थित उनके निवास पर श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन किया गया, जहां उन्हें भावभीनी विदाई दी गई।
कार्यक्रम की शुरुआत लोक भूषण सम्मान से सम्मानित डॉ. जयप्रकाश मिश्रा द्वारा उनके चित्र पर पुष्प अर्पण कर की गई। उन्होंने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा, ‘लालमन सोनकर (Lalman Sonkar) में बचपन से ही देशभक्ति की लौ जल रही थी। वह अंग्रेजों के जमाने में ‘रणभेरी’ जैसे क्रांतिकारी अखबार को घर-घर बांटते थे और लोगों से कहते थे – अंग्रेजों को देश से भगाना है।’
उन्होंने आगे कहा कि लालमन जी ने आजादी के बाद भी अपने कर्म और विचारों से देश सेवा जारी रखी।
पूर्व सांसद विजय सोनकर शास्त्री ने उन्हें याद करते हुए कहा, ‘लालमन जी एक सादे जीवन वाले, लेकिन भीतर से फौलादी इरादों वाले व्यक्ति थे। देश के लिए उनका समर्पण अतुलनीय था।’
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इस अवसर पर डॉक्टर अशोक सोनकर शास्त्री, नाटककर्मी अष्टभुजा मिश्र, दिनेश श्रीवास्तव, अभिनेता रणजीत कावले, गायक राकेश तिवारी सहित कई प्रतिष्ठित लोगों ने श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा, ‘आज भले ही लालमन जी हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी देशभक्ति आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है।’
उनके छोटे पुत्र व टीवी सीरियल निर्माता दिलीप सोनकर ने कहा, ‘पिताजी की अंतिम इच्छा थी कि ‘काशी विश्वनाथ’ (Kashi Vishwanath) सीरियल वह अपने जीवनकाल में देख पाते। वह इच्छा अधूरी रह गई, लेकिन हमें विश्वास है बाबा विश्वनाथ की कृपा से यह सपना पूरा होगा और यह धारावाहिक पूरी दुनिया में काशी (Kashi) की महिमा को पहुंचाएगा।’

देर रात तक श्रद्धांजलि देने वालों का सिलसिला चलता रहा। भाजपा जिला अध्यक्ष और विधान परिषद सदस्य हंस राज विश्वकर्मा, संजय सोनकर, प्रभात सिंह, प्रवेश पटेल, अभिनेता रणजीत कावले, मान सिंह, हिमांशु तिवारी, के के द्विवेदी जैसे तमाम गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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आयोजकों की ओर से अतिथियों का स्वागत बड़े पुत्र जगदीश सोनकर ‘मुन्ना जी’ और बड़े भतीजे अनिल सोनकर शास्त्री ने किया। कार्यक्रम का संचालन रामयश मिश्रा ने किया और धन्यवाद ज्ञापन दिलीप सोनकर ने किया। इस अवसर पर विकास सोनकर, विशाल सोनकर, सतीश सोनकर, रितेश सोनकर, आकाश सोनकर सहित कई परिजन और शुभचिंतक उपस्थित रहे।
फल की टोकरी में छुपाकर क्रांति की रणभेरी
दशाश्वमेध घाट (Dashashwamedh ghat) पर अपनी मां के साथ फल की टोकरी में छुपाकर, बाबूराव विष्णु पराड़कर द्वारा प्रकाशित ‘अखबार को घर-घर बांटना, बालक लालमन (Lalman Sonkar) की दिनचर्या का हिस्सा बन गया था। अंग्रेज पुलिस से मार खाना और जेल की यात्रा करना भी उनके हौसले को डिगा नहीं पाया।
15 वर्ष की अवस्था में उनका विवाह प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी शिवलाल सोनकर ‘नेताजी’ की सुपुत्री कमला से हुआ। जीवनभर उन्होंने देश के लिए जिया और बाद में समाज सेवा को अपना व्रत बना लिया।
उनकी प्रेरणा से उनके पुत्र दिलीप सोनकर ने ‘रणभेरी’, ‘लाल-रेखा’, ‘परशुराम’ जैसे लोकप्रिय धारावाहिक बनाए, जो देशभक्ति और सांस्कृतिक मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने में सफल रहे।


